हिमाचल किसान सभा की सुंदरनगर इकाई ने प्रदेश में प्रस्तावित स्मार्ट मीटरिंग परियोजना के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। किसान सभा ने सोमवार को वरिष्ठ अधिशासी अभियंता, विद्युत मंडल सुंदरनगर के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर परियोजना को तत्काल स्थगित करने की मांग की। सभा का कहना है कि मौजूदा डिजिटल बिजली मीटरों को हटाकर नए स्मार्ट मीटर लगाने का फैसला उपभोक्ताओं की सहमति के बिना लागू नहीं किया जाना चाहिए। संगठन ने स्मार्ट मीटर की लागत को बिजली टैरिफ के जरिए उपभोक्ताओं से वसूलने की प्रस्तावित व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। किसान सभा के सदस्य सुरेंद्र सेन ने स्मार्ट मीटरिंग योजना की अनुमानित और वास्तविक लागत के साथ निविदा प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच की मांग की। उन्होंने करीब 2,500 करोड़ रुपये के वित्तीय औचित्य की भी पड़ताल करवाने की बात कही। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर लगाने का अतिरिक्त आर्थिक बोझ गरीबों, किसानों, सब्सिडी प्राप्त परिवारों और आम बिजली उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाना चाहिए। जिला सदस्य जगमेल ठाकुर ने मीटर रीडिंग और बिलिंग से जुड़े कर्मचारियों के रोजगार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई। उन्होंने बिजली उपभोक्ताओं के खपत संबंधी डेटा की निजता और सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। किसान सभा ने प्रीपेड बिजली, सब्सिडी में संभावित बदलाव और डीबीटी जैसी व्यवस्थाओं को लागू करने से पहले सार्वजनिक स्तर पर चर्चा कराने की मांग की। सभा का कहना है कि स्मार्ट मीटरिंग से जुड़े किसी भी निर्णय में उपभोक्ता संगठनों की भागीदारी और नियामकीय समीक्षा जरूरी है। ज्ञापन सभा के सचिव रामजी दास की अध्यक्षता में सौंपा गया। किसान सभा ने सरकार और एचपीएसईबीएल को 10 दिन का समय देते हुए कहा कि मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो जनहित में लोकतांत्रिक और संघर्षात्मक कदम उठाए जाएंगे।