मंडी से लगधार-पलेह क्षेत्र तक राष्ट्रीय राजमार्ग-003 (एनएच-003) पर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और सड़क सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठे हैं। पूर्व प्रति कुलपति एवं शिक्षाविद् प्रो. अनुपमा सिंह ने आरोप लगाया है कि सड़क निर्माण का कार्य पूरा होने के बावजूद जल निकासी, सुरक्षा दीवारों और अन्य आवश्यक कार्य अधूरे हैं। उन्होंने निर्माण कार्यों की स्वतंत्र जांच कराने और सभी कमियों को शीघ्र दूर करने की मांग की है। जारी बयान में प्रो. अनुपमा सिंह ने कहा कि कई स्थानों पर पर्याप्त ड्रेनेज व्यवस्था और आवश्यक कल्वर्ट नहीं बनाए गए हैं। जहां कल्वर्ट बनाए गए हैं, वहां भी उनकी संख्या और क्षमता पर्याप्त नहीं है। इसके अलावा कई स्थानों पर रिटेनिंग वॉल और सुरक्षा दीवारों का निर्माण नहीं होने से सड़क किनारों पर कटाव और भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ महीनों में निर्मित कई रिटेनिंग वॉल पहली ही बरसात में क्षतिग्रस्त होने लगी हैं, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगते हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो आगामी मानसून के दौरान सड़क और आसपास के क्षेत्रों में नुकसान के साथ जन-धन की हानि की आशंका बढ़ सकती है। प्रो. अनुपमा सिंह के अनुसार उन्होंने 25 जून 2025 को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर क्षेत्र की समस्याओं से अवगत कराया था। उनका दावा है कि मंत्री ने आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन एक वर्ष बाद भी अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है। उन्होंने यह भी कहा कि सड़क किनारे कई स्थानों पर पुराने ट्रक, निर्माण मशीनरी और अन्य सामग्री लंबे समय से पड़ी हुई है, जिससे यातायात प्रभावित होने के साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ रहा है। उन्होंने निर्माण कंपनी से ऐसे सभी अनुपयोगी वाहनों और सामग्री को तत्काल हटाने की मांग की। प्रो. अनुपमा सिंह ने कहा कि स्थानीय लोगों की ओर से लगातार शिकायतें किए जाने के बावजूद संबंधित अधिकारियों और निर्माण कंपनी की ओर से संतोषजनक कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने जिला प्रशासन और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच, अधूरे कार्यों को शीघ्र पूरा करने, सड़क सुरक्षा के सभी आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित करने तथा सड़क किनारे पड़े अवरोधों को हटाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि जल्द सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो क्षेत्र की मौजूदा स्थिति और लोगों की शिकायतों का विस्तृत प्रतिवेदन दोबारा केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री को सौंपा जाएगा।