नौकरी के पीछे भागने की होड़ छोड़कर अपने गांव की मिट्टी से जुड़े रहते हुए खेत-खलिहानों को आय का जरिया बनाने में उच्च शिक्षित युवा अब मिसाल बन रहे हैं। ऐसे ही युवा हैं मंडी जिले के गोहर ब्लॉक के तरौर गांव के जगदीश चंद। बीएससी फिजिक्स की डिग्री प्राप्त करने के बाद जब उनके साथी बेहतर नौकरी की तलाश में शहरों की ओर जा रहे थे, तब जगदीश ने अपनी जड़ों की ओर लौटने का फैसला किया। उन्होंने रसायन मुक्त खेती और आत्मनिर्भरता की राह चुनी। आज वे न केवल अपनी 20 बीघा जमीन पर एक सफल किसान हैं, बल्कि अन्य किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत भी बन गए हैं। उन्होंने वर्ष 2016-17 में अपनी स्नातक की डिग्री पूरी की। इसके बाद खेती-बाड़ी व पशुपालन के पारंपरिक व्यवसाय से जुड़े। जगदीश ने अपनी 20 बीघा जमीन में से 10 बीघा पर प्राकृतिक खेती शुरू की। आज वे इस जमीन पर पारंपरिक फसलों के अलावा नकदी फसलें मटर, लहसुन और विभिन्न प्रकार की सब्जियां उगा रहे हैं। उधर, जिला परियोजना उप निदेशक डॉ. हितेंद्र सिंह ने बताया कि जिले में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए 50 प्राकृतिक खेती क्लस्टर बनाए गए हैं और 33 जैव आदान संसाधन केंद्र खोले गए हैं। गोहर विकास खंड के खंड तकनीकी प्रबंधक विजय कुमार के अनुसार बालड़ी, छपराहण, मिश्राणरी और दिलग टिकरी चार क्लस्टर बनाए गए हैं, जिनमें लगभग 600 किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा गया है। पूरे गोहर ब्लॉक में अब तक लगभग 2500 किसानों ने प्राकृतिक खेती पद्धति को अपनाया है।