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Mandi: 24 साल सेना में सेवा, अब ड्रेगन फ्रूट की खेती से लिख रहे सफलता की नई कहानी; मंडी के पूर्व सैनिक बने मिसाल

Ankesh Dogra Updated Fri, 10 Jul 2026 11:37 AM IST

भारतीय सेना में 24 वर्षों तक सेवा देने के बाद सेवानिवृत्त सैनिक घनश्याम ने अब खेती के क्षेत्र में नई पहचान बनाई है। मंडी जिले की नेहरा पंचायत के बनी गांव में उन्होंने विदेशी फल ड्रेगन फ्रूट की सफल खेती शुरू कर यह साबित किया है कि आधुनिक तकनीक और दृढ़ संकल्प के साथ पहाड़ी क्षेत्रों में भी उच्च मूल्य वाली फसलों का उत्पादन संभव है। घनश्याम ने वर्ष 2025 में करीब एक बीघा भूमि पर 400 ड्रेगन फ्रूट के पौधे लगाए। पौधों के बेहतर विकास के लिए उन्होंने लगभग 100 सीमेंट के विशेष पोल तैयार करवाए, जिन पर वैज्ञानिक तरीके से बेलों को विकसित किया गया। वर्तमान में पौधों पर फूल आ चुके हैं और जल्द ही फल उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। घनश्याम बताते हैं कि ड्रेगन फ्रूट की खेती का विचार उन्हें एक मित्र से मिला, जिसने महाराष्ट्र से इसके पौधे मंगवाए थे। इसके बाद उन्होंने इस फल की खेती को लेकर गहराई से जानकारी जुटाई। इसी दौरान उन्हें पता चला कि ऊना जिले में बड़े स्तर पर ड्रेगन फ्रूट की खेती की जा रही है। वहां जाकर उन्होंने पौधों की देखभाल, सिंचाई, संरचना और उत्पादन की तकनीक को समझा। इसके बाद उन्होंने ऊना से लगभग 100 रुपये प्रति पौधा की दर से 400 पौधे खरीदकर अपने गांव में बागीचा तैयार किया। नियमित देखभाल और मेहनत का परिणाम अब उनके खेत में दिखाई देने लगा है। घनश्याम का कहना है कि उन्होंने बागवानी विभाग से सहायता के लिए संपर्क किया था, लेकिन उन्हें किसी प्रकार का आर्थिक अनुदान या सरकारी मदद नहीं मिल सकी। इसके बावजूद उन्होंने अपने संसाधनों से पूरी परियोजना तैयार की। उनका मानना है कि यदि सरकार और संबंधित विभाग किसानों को तकनीकी व वित्तीय सहयोग दें, तो प्रदेश में ड्रेगन फ्रूट जैसी लाभकारी फसलों का दायरा तेजी से बढ़ सकता है। मंडी जिले में ड्रेगन फ्रूट की खेती अभी शुरुआती दौर में है। ऐसे में घनश्याम का प्रयास क्षेत्र के किसानों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया है। उनका मानना है कि पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक और अधिक लाभ देने वाली फसलों को अपनाकर किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। ड्रेगन फ्रूट की मांग लगातार बढ़ रही है। किसानों को इसकी फसल के लिए आमतौर पर 180 से 300 रुपये प्रति किलोग्राम तक कीमत मिल जाती है, जबकि खुदरा बाजार में इसका मूल्य 250 से 500 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच जाता है। बेहतर गुणवत्ता और कम उपलब्धता के समय इसकी कीमत इससे भी अधिक हो सकती है। ड्रेगन फ्रूट विटामिन-सी, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, पाचन तंत्र को बेहतर बनाने, हृदय स्वास्थ्य को मजबूत रखने और वजन नियंत्रित करने में सहायक माना जाता है। इसमें आयरन, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। घनश्याम की यह पहल बताती है कि यदि नई तकनीक, वैज्ञानिक सोच और मेहनत का समन्वय किया जाए तो खेती भी रोजगार और आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बन सकती है।

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