ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि 1 जुलाई 2026 से मनरेगा की जगह लागू होने जा रही वीबी-जी राम जी योजना का 90:10 वित्तीय अनुपात हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था के तहत प्रदेश को सालाना करीब 800 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ सकता है। मंडीके पड्डल मैदान में आयोजित जिला स्तरीय नवनियुक्त प्रधान एवं उपप्रधान शपथ ग्रहण समारोह के बाद मीडिया से बातचीत में अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार की योजनाओं को लागू करना राज्यों की जिम्मेदारी है, लेकिन पहाड़ी राज्यों की विशेष परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस योजना के दूरगामी परिणाम प्रदेश के हित में नहीं होंगे। मंत्री ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में मनरेगा के तहत हिमाचल प्रदेश को 250 लाख मैनडेज का लक्ष्य मिला था, जबकि प्रदेश में 407 लाख मैनडेज का सृजन हुआ। यह लक्ष्य से 157 लाख अधिक है, जिससे योजना की प्रदेश में उपयोगिता का पता चलता है। इससे पहले अनिरुद्ध सिंह ने मंडी जिले की 577 ग्राम पंचायतों के नवनिर्वाचित प्रधानों और उपप्रधानों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।