हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के पंडोह क्षेत्र के हटौण गांव में पिछले दो महीनों से बना विशाल गड्ढा अब सिर्फ एक गड्ढा नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का जीवंत उदाहरण बन गया है। हैरानी की बात यह है कि जिला प्रशासन प्रभावित परिवार को केवल खोखले आश्वासन देकर टरकाने में लगा हुआ है। जिंदगी की पूरी कमाई लगाकर घर बनाने के बाद आज हालात ऐसे हैं कि न घर रहने लायक बचा है और न ही छोड़ने की स्थिति में हैं। प्रभावित इस नुकसान के पीछे एनएचएआई की निर्माणाधीन टनल को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं लेकिन प्रशासन फिलहाल किसी तरह के निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाया है। यहां जीआईएस सर्वे की प्रक्रिया के बाद रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। घटना के तुरंत बाद एसडीएम मंडी और एनएचएआई की टीम ने मौके का दौरा किया था और तत्काल कार्रवाई का आश्वासन दिया गया लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी जमीन पर कुछ नहीं बदला। सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है। बड़े हादसे के बाद त्वरित कार्रवाई शुरू होगी। दो महीने बाद अब स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि गड्ढे का आकार लगातार बढ़ रहा है और घर का आधा हिस्सा सीधा खतरे की जद में आ चुका है। पीड़ित परिवार का साफ कहना है कि या तो उन्हें उनके मकान का पूरा मुआवजा दिया जाए, या फिर गड्ढे को तुरंत भरकर स्थायी समाधान किया जाए। प्रशासन की बेरुखी यह है कि डीसी मंडी और एसडीएम मंडी से बार-बार मिलने के बावजूद केवल जल्द समाधान का रटा-रटाया जवाब ही मिल रहा है। हटौण गांव का यह मामला अब सिर्फ एक परिवार की समस्या नहीं रहा बल्कि यह सिस्टम की संवेदनहीनता और जवाबदेही की कमी का खुला सबूत बन चुका है। अब देखना यह है कि प्रशासन समय रहते जागता है या फिर किसी अनहोनी के बाद जिम्मेदारी तय करने का नाटक करता है। उधर, कई बार संपर्क करने के बाद एसडीएम सदर रूपिंद्र कौर ने व्हाट्स एप पर बताया कि जीआईएस सर्वे हो गया है। इसकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।