कुल्लू में कांगड़ा घाटी की सदियों पुरानी ‘रल्ली का विवाह’ परंपरा इस वर्ष भी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ निभाई गई। एक महीने तक चले इस विशेष आयोजन का समापन मंगलवार को विधि-विधान के साथ विसर्जन कर किया गया। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार ‘रल्ली का विवाह’ एक पारंपरिक रस्म है, जिसे क्षेत्र में सुख-समृद्धि और अच्छी फसल की कामना के साथ मनाया जाता है। इस दौरान जिला मुख्यालय के अखाड़ा बाजार, सुल्तानपुर, लोअर ढालपुर में विशेष पूजन, गीत-संगीत और पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। मंगलवार को अंतिम दिन श्रद्धालुओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना की और उसके बाद विधिवत विसर्जन किया। इस मौके पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और पूरे वातावरण में भक्ति और उत्साह का माहौल देखने को मिला। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह परंपरा उनकी सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा है, जिसे हर वर्ष पूरे हर्षोल्लास के साथ निभाया जाता है।