जनजातीय क्षेत्र लाहौल घाटी के पहाड़ों में ठंड बढ़ने और पानी जमने के साथ ही वन्यजीव भी निचले क्षेत्रों का रुख कर रहे हैं। बीते रविवार को तिंदी क्षेत्र में दो हिमालयन थार कैमरे में कैद हुए हैं। लाहौल के अमीर जस्पा ने तिंदी क्षेत्र में दो हिमालयन थार को अपने कैमरे में कैद किया। इन्हें वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी का शौक है। वन विभाग के अधिकारी, कर्मचारी बताते हैं कि उन्होंने यह सुना है कि लाहौल घाटी के तिंदी और मयाड़ क्षेत्र के जंगलों में हिमालयन थार होता है, लेकिन अब प्राणी के यहां होने के पुख्ता सबूत मिल रहे हैं। लाहौल घाटी की पहाड़ियों में आइबैक्स (टंगरोल) का होना तो अब आम बात हो गई है। आइबैक्स को मनाली- लेह सड़क के समीप इन दिनों झुंडों में विचरते देखा जा सकता है। बर्फानी तेंदुआ, भूरा और काला भालू भी कैमरे में कैद हो रहे हैं। अब दुर्लभ कस्तूरी मृग और हिमालयन थार भी यहां दिखने लगे हैं। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि वन्य जीवों के कुनबे में वृद्धि हो रही है। हिमालयन थार का मिलना शोधार्थियों के लिए यह हर्ष की बात है जो कुछ वर्षों से लाहौल क्षेत्र में भी नई प्रजाति के वन्य प्राणियों के खोज और अध्ययन में लगे हैं। आमतौर पर समुद्रतल से 2500-3000 मीटर की ऊंचाई पर पाए जाने वाले यह वन्यजीव अपनी प्यास बुझाने के लिए निचले क्षेत्रों में नदी नालों का रुख कर रहे हैं।