अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में हर दिन की शुरुआत देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना से हो रही है। जिला भर से ढालपुर मैदान में विराजमान हुए देवी-देवता के अस्थायी शिविर में पुजारी और कारकून ढोल-नगाड़ों और शंख ध्वनि से पूजा करते नजर आ रहे। जबकि शाम की पूजा और आरती भी अस्थायी शिविर में देव विधि से की जाती है।