प्रदेश सहित पूरे देश में शनिवार को सीटू ने केंद्र सरकार की ओर से लागू की जा रही चार श्रम संहिताओं के विरोध में व्यापक आंदोलन की घोषणा की है। सीटू का आरोप है कि केंद्र की मोदी सरकार ने आजादी से पहले और बाद में बने कुल 43 श्रम कानूनों को समाप्त कर उन्हें चार श्रम संहिताओं में बदल दिया है, जिससे मजदूरों के अधिकारों पर गंभीर प्रहार हुआ है। सीटू नेताओं का कहना है कि पुराने श्रम कानूनों के तहत मजदूरों को कोर्ट, कचहरी और श्रम विभाग के माध्यम से अपने अधिकारों की रक्षा और न्याय पाने का अवसर मिलता था। लेकिन नई श्रम संहिताओं के लागू होने से मजदूर इन कानूनी संरक्षणों से वंचित हो गए हैं। कई महत्वपूर्ण कानूनों को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है, जबकि शेष को इस तरह संशोधित किया गया है कि वे मजदूरों के हितों की बजाय पूंजीपतियों के पक्ष में काम करें।