सुहागिन महिलाओं के प्रमुख पर्व करवा चौथ को लेकर धर्मशाला के बाजारों में रौनक बढ़ गई है। मेहंदी के स्टॉल, चूड़ियों की दुकानें और साड़ियों के शोरूम महिलाओं से गुलजार हैं। पर्व की तैयारियों के बीच महिलाएं सोलह शृंगार के सामान और पूजा सामग्री की खरीदारी कर रही हैं। बाजारों में बढ़ी चहल-पहल से त्योहार का उत्साह साफ नजर आ रहा है। करवा चौथ पर महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के साथ व्रत रखती हैं। शाम को शुभ मुहूर्त में भगवान शिव, माता पार्वती, श्री गणेश और करवा माता की पूजा-अर्चना करने के साथ व्रत कथा सुनने का विधान है। चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलने की परंपरा निभाई जाती है। करवा चौथ के दिन कई बार मौसम खराब होने या आसमान में बादल छाए रहने के कारण चंद्रमा दिखाई नहीं देता। ऐसी स्थिति में व्रत रखने वाली महिलाओं के मन में व्रत खोलने को लेकर असमंजस हो सकता है। पंडित शिव शर्मा के अनुसार, यदि बादलों के कारण चांद नजर न आए तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। महिलाएं चंद्रोदय की दिशा की ओर मुख करके भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान चंद्रमा का ध्यान कर सकती हैं। इसके अलावा चावल से चंद्रमा की आकृति बनाकर अर्घ्य देने का विकल्प भी बताया गया है। हालांकि, स्थानीय परंपरा और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विधि में अंतर हो सकता है। इसलिए महिलाएं अपनी पारिवारिक परंपरा या स्थानीय पुरोहित की सलाह के अनुसार पूजा कर सकती हैं। करवा चौथ से पहले मेहंदी लगवाने के लिए महिलाओं की भीड़ उमड़ रही है। चूड़ियों, साड़ियों और शृंगार सामग्री की दुकानों पर भी रौनक है। महिलाएं पर्व के लिए पारंपरिक परिधान और पूजा की सामग्री खरीदने में जुटी हैं। करवा चौथ पर पूजा, व्रत कथा और चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा के साथ बाजारों में भी त्योहार का उत्साह देखने को मिल रहा है।