उपमंडल भोरंज की ग्राम पंचायत पपलाह के प्रतिनिधियों व ग्रामीणों ने बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) चयन प्रक्रिया की नई गाइडलाइन को पूर्णतः अव्यवहारिक और अन्यायपूर्ण बताते हुए एसडीएम भोरंज शशिपाल शर्मा को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों का कहना है कि इस गाइडलाइन के कारण सैकड़ों जरूरतमंद परिवार सूची से बाहर हो गए हैं, जिससे उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं और सुविधाओं से वंचित होना पड़ेगा। पहले विकलांग, विधवा, वृद्ध व असहाय लोग स्वतः ही बीपीएल में शामिल होते थे। लेकिन नई गाइडलाइन के अनुसार यदि विकलांगता 50 प्रतिशत से कम है या कोई व्यक्ति दिहाड़ी मजदूरी कर रहा है, तो उसे बीपीएल में नहीं माना जा रहा, भले ही उसकी आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर हो। ग्रामीणों ने कहा कि कुछ परिवारों के पास मात्र दो पक्के कमरे हैं, जिन्हें उनके पूर्वजों द्वारा या सरकारी सहायता से बनाया गया था, उन्हें अमीर मान लिया गया है। जबकि ऐसे परिवार आज भी कर्ज में डूबे हुए हैं और बच्चों की पढ़ाई व बुजुर्गों की दवा तक मुश्किल से कर पा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कई वृद्धजन, बीमार या अस्पताल में भर्ती लोग आवेदन की प्रक्रिया में भाग नहीं ले पाए, जिससे वे सूची से बाहर रह गए हैं। ऐसे मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। ग्रामीणों ने चेताया कि यदि ऐसी ही गाइडलाइन लागू रही तो न केवल गरीबों की शिक्षा और स्वास्थ्य प्रभावित होगा, बल्कि स्वरोजगार योजनाएं जैसे मुर्गी पालन, बकरी पालन, डेयरी इत्यादि से मिलने वाला लाभ भी समाप्त हो जाएगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। ज्ञापन सौंपने वालों में पंचायत प्रधान अंकुश सैणी, उपप्रधान अनूप शर्मा, जमना देवी, रीना देवी, अजुध्या देवी, शकुंतला देवी, सरोज कुमारी, सुमन देवी, राकेश कुमार, अनीता देवी, मीना कुमारी, कमला देवी, अमरनाथ, सुषमा देवी, अनीता देवी सहित कई ग्रामीण शामिल रहे। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस गाइडलाइन की पुनः समीक्षा कर वास्तविक गरीब और जरूरतमंद परिवारों को बीपीएल सूची में शामिल किया जाए ताकि वे आवश्यक सरकारी सुविधाओं का लाभ उठा सकें। उधर इस बारे एसडीएम भोरंज शशिपाल शर्मा ने बताया कि पपलाह ग्राम पंचायत ग्रामीण व दिव्यांग जन शिकायत लेकर आये थे उनकी शिकायत सरकार को भेजी जाएगी।