नगर निगम चुनावों को 2 वर्ष के लिए टालने की चर्चा ने लोकतांत्रिक मूल्यों पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। पंचायत प्रधान उषा बिरला ने सरकार के इस प्रयास को जनता के मताधिकार पर सीधा प्रहार बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज किया है। उषा बिरला ने कहा कि जनता को अपने प्रतिनिधि चुनने का अधिकार है, उसे छीनना लोकतंत्र के साथ अन्याय है। नगर परिषदों और निगमों का कार्यकाल बढ़ाकर चुनाव को टालने का प्रयास लोकतांत्रिक परंपराओं को कमजोर करता है।” उन्होंने सवाल उठाया कि जब हर स्तर पर सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही की बात करती है, तो फिर चुनावों से बचने की कोशिश क्यों? यह मुद्दा अब 'जनता बनाम व्यवस्था' के टकराव की ओर बढ़ता दिख रहा है।