मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए बनाए गए श्रम कानूनों को खत्म करके चार श्रम संहिताओं में बदलने और मनरेगा में किए गए नाम परिवर्तन को लेकर सीटू जिला कमेटी और मजदूरों ने गांधी चौक पर धरना प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन को सीटू के राष्ट्रीय सचिव डॉ. कश्मीर सिंह ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने 29 श्रम कानूनों को खत्म करके चार श्रम संहिताओं में बदल दिया है। उन्होंने कहा कि उद्योगपतियों, कंपनियों, ठेकेदारों को लाभ देने के लिए इन कानूनों में बदलाव किया गया है। उन्होंने कहा कि देश के मजदूरों ने लंबी लड़ाई और अनगिनत कुर्बानियों के बल पर आठ घंटे काम करने का अधिकार हासिल किया था। इसे मोदी सरकार ने इन नई श्रम संहिताओं में बारह घंटे कर दिया है। रोजगार की सुरक्षा ही समाप्त कर दी गई है, महिलाओं से रात को भी काम लेने का कानून बनाया गया है जबकि इससे पहले और आज भी पूरी दुनिया में महिलाओं से आवश्यक सेवाओं के अलावा रात को कहीं भी काम नहीं लिया जाता है। मजदूरों के संगठित होने और अपनी मांगों के लिए आवाज उठाने के अधिकार को भी कमजोर किया गया है। नई श्रम संहिताओं को लागू करने का मकसद देश के मजदूर वर्ग को निहत्था और बंधुआ बनाया जाना है । ये उद्योगपतियों, कंपनियों व ठेकेदारों के मुनाफे को बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। सीटू ने मनरेगा के कानून को खत्म करके नई योजना में बदलने के मोदी सरकार के फैसले का भी कड़ा विरोध किया। कश्मीर सिंह ने कहा कि मनरेगा कानून देश के करोड़ों ग्रामीण मजदूरों जिनमें अधिकतर महिलाएं हैं के लिए जीने का सहारा है उसे भी मोदी सरकार ने अब छीन लिया है। इस मौके पर जिला सचिव जोगिंद्र कुमार, जिला अध्यक्ष संतोष कुमार, प्रताप राणा, रंजन शर्मा, नवीन कुमार उपस्थित रहे।