फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हमीरपुर: किसान ने तैयार किया वन औषधीय पौधे खैर का बगीचा

Krishan Singh Updated Tue, 17 Feb 2026 04:18 PM IST

उपमंडल नादौन के जोलसप्पड़ क्षेत्र के प्रगतिशील किसान ने वन औषधीय पौधा खैर का बगीचा तैयार किया है। क्षेत्र के 70 वर्षीय किसान केहर सिंह पुत्र मिलखी राम व उनकी पत्नी ने पांच वर्ष पूर्व दस कनाल भूमि में 1000 वन औषधीय पौधे लगाए हैं। उन्होंने कहा कि परंपरा के अनुसार खेतों में सदियों से गेहूं, धान और मक्की आदि बीजने का कार्य किसान करते हैं। लेकिन वर्तमान समय में लावारिस पशु फसलों को तबाह कर रहे हैं। इसी से निराश होकर खेती करने का नया तरीका इजाद कर औषधीय पौधे खैर का एक ब्लॉक स्थापित किया। वन विभाग से खैर की नर्सरी खरीद बरसात के मौसम में एक ब्लॉक लगा दिया। उसके बाद खैर की फलियों से बीज एकठ्ठे किए। सुंदरनगर से पॉलीबैग मंगवाए। नर्सरी तैयार करके बरसात के समय में दूसरा ब्लॉक स्थापित किया। उन्होंने कहा कि पहला ब्लॉक पांच वर्ष पूर्व व दूसरा ब्लॉक तीन वर्ष पूर्व लगाया। वर्तमान समय में बगीचे में तैयार खैर के पेड़ 10 से 12 फीट ऊंचे हो गए हैं। 10 वर्षों बाद एक खैर के पेड़ की कीमत 20 से 25 हजार रुपये तक आराम से मिल जाएगी। किसान केहर सिंह ने कहा कि खैर की खेती का काम सबसे अच्छा है। न जंगली जानवरों से खतरा न आवारा पशुओं से और न ही खाद-पानी की जरूरत पड़ती है। वन विभाग वन परिक्षेत्र नादौन के वन परिक्षेत्र अधिकारी सुरेश शर्मा ने कहा कि खैर एक वन औषधीय पौधा है। इसलिए परिपक्व होने पर किसान के लिए आय का ठोस आधार हो सकता है। इसके रस से निकलने वाला कत्था बाजार में काफी महंगा बिकता है। क्योंकि यह अधिकतर आयुर्वेदिक दवाइयां बनाने के काम आता है और कई बार इसका उपयोग पान आदि में किया जाता है।

Latest

विज्ञापन

Recommended

विज्ञापन
Next
एप में पढ़ें