जनजातीय क्षेत्रों में नौनिहालों के लिए सर्दियों में स्कूल बंद हो जाते हैं। वहीं दूसरी ओर पांगी के फिंडरू निवासी एक सरकारी अध्यापक देवी चरण नौनिहालों के लिए अपने घर के दरवाजे खोल देता है। पिछले कई सालों से बच्चों को अपने घर में निशुल्क शिक्षा ग्रहण प्रदान कर रहे हैं। शिक्षक राजकीय प्राइमरी स्कूल फिंडपार में मुख्याध्यापक के पद पर तैनात है। जब पांगी में कड़ाके की ठंड के चलते स्कूलों पर ताले लग जाते हैं, तब देवी चरण अपने घर के दरवाजे खोलकर उसे ही स्कूल बना देते हैं। मौजूदा समय में देवी चरण का यह घर सिर्फ फिंडरू तक सीमित नहीं रह गया है। बल्कि, पांगी घाटी की विभिन्न पंचायतों से बच्चे यहां शिक्षा ग्रहण करने पहुंच रहे हैं। हर दिन करीब 50 बच्चों को शिक्षक अपने घर में पूरी तरह निशुल्क पढ़ाने का काम कर रहे हैं। शिक्षक की इस सेवा भाव को प्रदेश सरकार ने भी सराहा है और उन्हें गौरव पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। उनकी मेहनत का नतीजा यह है कि उनके द्वारा पढ़ाए गए बच्चे आज जवाहर नवोदय विद्यालय, एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय और सैनिक स्कूल जैसी कठिन और परीक्षाओं में सफलता हासिल कर रहे हैं। आज के दौर में जहां शिक्षा एक बड़ा व्यापार बन चुकी है और कोचिंग के नाम पर लाखों रुपये वसूले जा रहे हैं। वहीं, देवी चरण का यह निस्वार्थ सेवा भाव समाज के सामने एक दिल छू लेने वाली मिसाल पेश करता है।