स्वारघाट में बड़े पैमाने पर भूकंप पर आधारित मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। सुबह 4:25 बजे शुरू हुई इस मॉक ड्रिल में 7.5 तीव्रता वाले भूकंप का परिदृश्य तैयार किया गया था, जिसमें उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश तक झटकों का आभास कराया गया। इस मॉक ड्रिल का नेतृत्व एनडीआरएफ 14वीं बटालियन के द्वितीय कमान अधिकारी रजनीश शर्मा ने किया। परिदृश्य के अनुसार भूस्खलन, सुरंग का ढहना, इमारतों का गिरना और सड़कों का अवरुद्ध होना जैसी आपदाओं को दर्शाया गया। ड्रिल में स्वारघाट को सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र के रूप में दर्शाया गया, जहां राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित एक सुरंग के ढहने से गंभीर स्थिति उत्पन्न हुई। इस काल्पनिक आपदा में 120 से अधिक लोगों को हताहत और कई अन्य को मलबे में फंसा हुआ बताया गया। लगातार आ रहे आफ्टरशॉक्स और खराब मौसम ने राहत और बचाव कार्य को और भी चुनौतीपूर्ण बना दिया। एनडीआरएफ की 14वीं बटालियन की कुल 12 टीमें इस अभ्यास में सक्रिय रहीं, जिनमें से छह टीमें स्वारघाट में तैनात की गईं। इन टीमों ने खोज और बचाव कार्य (सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन), घायलों की प्राथमिक चिकित्सा, भोजन, कंबल और अन्य राहत सामग्री के वितरण का सफलतापूर्वक अभ्यास किया। इन टीमों का नेतृत्व एनडीआरएफ के कमांडेंट बलजिंदर सिंह कर रहे थे। स्लापड़ से आई एक टीम ने स्वारघाट में रात्रि विश्राम (नाइट हॉल्ट) किया, ताकि आपात स्थिति में रात के समय की प्रतिक्रिया क्षमता और समन्वय का भी आकलन किया जा सके। मॉक ड्रिल के दौरान द्वितीय कमान अधिकारी रजनीश शर्मा और उप-सेनानी नितेश शर्मा भी मौके पर मौजूद रहे। उन्होंने पूरे अभियान की निगरानी की और टीमों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। अधिकारियों ने कहा कि यह मॉक ड्रिल प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारी का हिस्सा है। हिमालयी क्षेत्र में संभावित बड़े भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए एनडीआरएफ की तैयारी और समन्वय क्षमताओं की परख के लिए एक महत्वपूर्ण अभ्यास है।