झंडूता विधानसभा क्षेत्र में विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत क्षेत्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का उद्देश्य प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना और किसानों को इसके फायदों से अवगत कराना रहा। इसमें 5,000 से अधिक किसानों ने भाग लेकर जैविक खेती को लेकर अपनी जागरुकता दिखाई। मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने किसानों से सीधा संवाद किया। कहा कि प्राकृतिक खेती अब विकल्प नहीं, बल्कि समय की मांग है। यह न केवल धरती की उर्वरता को बनाए रखती है बल्कि किसानों को आत्मनिर्भर और खुशहाल बनाती है। उन्होंने रासायनिक खेती के नुकसान और जैविक पद्धति से होने वाले फायदों के बारे में किसानों को बताया। जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत, देशी गाय पर आधारित जैव इनपुट, फसल विविधता, जल-संरक्षण, कम लागत व ज्यादा उत्पादन जैसे बिंदुओं पर विस्तार से जानकारी दी। राज्यपाल ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल आर्थिक नहीं, सामाजिक और स्वास्थ्य के स्तर पर भी एक मजबूत समाधान है। इससे मिट्टी, जल और वायु की शुद्धता बनी रहती है और अगली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य मिलता है। उन्होंने किसानों को प्रेरित करते हुए इसे एक आंदोलन का रूप देने की अपील की। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत केंद्र सरकार ने 2481 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है। इसके अंतर्गत 15,000 पंचायतों तक 1 करोड़ किसानों को जोड़ने का लक्ष्य, 7.5 लाख हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती का विस्तार, 10,000 जैव-आदान संसाधन केंद्र की स्थापना, 2000 मॉडल फार्म तैयार किए जाएंगे। किसानों को प्रमाणित, प्रशिक्षण और विपणन में सहायता दी जाएगी। संगोष्ठी के दौरान विभिन्न राज्यों से आए प्रगतिशील किसानों ने मंच से अपने अनुभव साझा किए। इन किसानों ने बताया कि कैसे प्राकृतिक खेती अपनाकर उन्होंने रासायनिक खर्चों से मुक्ति पाई और बेहतर आय प्राप्त की। इस मौके पर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी, विधायक जीतराम कटवाल, विधायक त्रिलोक जामवाल आदि मौजूद रहे।