सोनीपत जिले की गोहाना तहसील में स्थित कथूरा गांव अपनी आस्था, वीरता और फौजी परंपरा के लिए पूरे क्षेत्र में विशेष पहचान रखता है। नरवाल खाप का महत्वपूर्ण केंद्र माने जाने वाले इस गांव ने वर्षों से अपनी सांस्कृतिक परंपराओं, सामाजिक एकता और देशभक्ति की विरासत को संभालकर रखा है। गांव के लोगों की मडुनाथ महाराज के प्रति गहरी श्रद्धा है। ग्रामीण मडुनाथ के आशीर्वाद को अपनी खुशहाली और विकास का आधार मानते हैं। गांव में होने वाले कई सामाजिक और धार्मिक कार्य आज भी इसी आस्था से जुड़े हुए हैं। कथूरा की सबसे बड़ी पहचान उसकी फौजी परंपरा है। करीब 300 फौजियों वाले इस गांव से स्वतंत्रता सेनानियों से लेकर आज भारतीय सेना, एयरफोर्स और अन्य सुरक्षा बलों में जवान देश की सेवा कर रहे हैं। गांव के कई परिवार ऐसे हैं जिनकी तीन, चार और यहां तक कि पांच पीढ़ियां लगातार सेना में रहकर राष्ट्र रक्षा का दायित्व निभा चुकी हैं। गांव के वीर सपूत शहीद रघुवीर सिंह ने वर्ष 2000 में जम्मू-कश्मीर के नौशेरा क्षेत्र में आतंकवादियों से मुकाबला करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था। उनकी याद में गांव में शहीद स्मारक और प्रतिमा स्थापित की गई है। यह स्मारक आज भी युवाओं को देशभक्ति, साहस और राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता है। ग्रामीणों का कहना है कि आस्था, वीरता, शौर्य और बलिदान की परंपरा ही कथूरा गांव की सबसे बड़ी ताकत है। यही कारण है कि यह गांव पूरे क्षेत्र में सम्मान और गौरव की दृष्टि से देखा जाता है।