गांव ठसका में गोचरन और वन भूमि को बचाने की मांग को लेकर ग्राम सभा बुलाई गई।घटकर ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव के पास मौजूद करीब 85 एकड़ वन भूमि को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। ग्रामीणों ने इस मामले में पंचायत पर बिना जानकारी दिए वन क्षेत्र को खत्म करने का आरोप लगाया है। राष्ट्रीय वन सुरक्षा परमार्थ ट्रस्ट के अध्यक्ष राम कुमार शास्त्री के अनुसार वर्ष 2023 में हुई गणना में इस वन भूमि में हजारों साल पुराने 738 जाल (स्लोवेरा) के पेड़ मौजूद थे, लेकिन अब इनकी संख्या 645 रह गई है। ग्रामीणों का कहना है कि कई पेड़ों को काटकर दबाने के मामले भी सामने आए हैं। इसको लेकर पुलिस में शिकायत दी गई थी, जिस पर एफआईआर भी दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि जाल प्रजाति के इन पेड़ों को प्राणवायु देवता योजना के तहत प्रति पेड़ हर साल 3000 रुपये देने का प्रावधान है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट भी इस प्रजाति को लुप्त होती श्रेणी में मानते हुए इनके कटान पर रोक लगा चुका है। ग्राम सभा में मौजूद लोगों ने वन भूमि और गोचरन भूमि को बचाने की मांग उठाई और प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच करवाने की अपील की। इस मौके पर पूर्व सरपंच राज कुमार, पूर्व सरपंच जोनी, पूर्व पंच दिलबाग, वर्तमान में पंच दिलबाग, हजका के बरोदा हलका के अध्यक्ष रमेश कुमार, उप प्रधान नरेन्द्र, राधेश्याम शर्मा,सत्यनारायण, आनंद कुमार, सचिव ओम प्रकाश, संजय शर्मा, रोहतास व अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।