आशा वर्कर यूनियन के आह्वान पर आशा कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर गोहाना रोड स्थित लघु सचिवालय के सामने धरना देकर रोष जताया। आशा वर्कर यूनियन की राज्य महासचिव सुनीता ने आशा कार्यकर्ताओं के साथ सरकार के नाम एसडीएम सुभाष चंद्र को ज्ञापन देकर उनकी मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की। राज्य महासचिव सुनीता ने कहा कि केंद्र सरकार ने 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर आशा कार्यकर्ताओं का सम्मान किया था। केंद्र सरकार ने भी माना है कि आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ की हड्डी हैं। कोरोना जैसी महामारी के दौरान भी आशा कार्यकर्ता ने फिल्ड में उतरकर काम किया है। इसके बावजूद 12 साल से आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। अगस्त 2024 में भी आशा वर्कर यूनियन के आह्वान पर जिला की 1267 कार्यकर्ता ने हड़ताल कर अपनी मांगों को उठाया था। इसके बावजूद सरकार की ओर से उनकी मांगों का समाधान करने की बजाय उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आशा कार्यकर्ता की जाे मांगे हैं, सरकार को उन पर जल्द फैसला लेना चाहिए। राज्य महासचिव सुनीता ने कहा कि उनकी राज्य सरकार से भी मांग है कि जरूरतों के अनुसार आशा कार्यकर्ता के मानदेय में बढ़ोतरी की जाए। 26 हजार रुपये न्यूनतम मानदेय किया जाए। उन्हें पक्का कर्मचारी बनाने के लिए पाॅलिसी तैयार की जाए। हड़ताल के दौरान काटा गया 73 दिन का मानदेय उन्हें दिया जाए। उनके मानदेय में प्रोत्साहन राशि को महंगाई भत्ते के साथ जोड़ा जाए। ईएसआई, पीएफ व सेवानिवृत्त लाभ सहित सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। अनुभव व योग्यता के आधार पर उनकी पदोन्नति की जाए।