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1971 की लड़ाई व परिवार से पहले बने खरावड़ के सिपाही ओमप्रकाश

विकास कुमार Updated Fri, 22 May 2026 08:56 PM IST

दिल्ली रोड पर शहर से 13 किलोमीटर दूर बसा खरावड़ योद्धाओं का गांव है। शहीदों, स्वतंत्रता सेनानियों व सैनिकों के गांव के योद्धाओं ने प्रथम विश्व युद्ध, द्वितीय विश्व युद्ध, स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, 1971 की पाक से लड़ाई व कारगिल युद्ध लड़ा है। कई शहीद हुए, कई घायल। ऐसे ही एक योद्धा थे भारत-पाक लड़ाई में ढाका में शहीद होने वाले देश के पहले जवान खरावड़ के सिपाही ओमप्रकाश। इन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने खुद अपने हाथ शहीद के परिवार को शोक संदेश लिखकर भेजा था। बाबा चमन ऋषि के धाम से प्रसिद्ध गांव की आबादी करीब 1 हजार है। इसमें से करीब 300 से अधिक परिवार सेना से जुड़े हैं। हिम्मत वतन की हमसे है.. जांबाज सैनिक, अभियान के तहत अमर उजाला ने गांव पूर्व सेना अधिकारियों से बातचीत की तो गांव का देश प्रेम व देश सेवा के लिए मर मिटने का जज्बा सामने आया। बड़े भाई शहीद ओमप्रकाश मलिक स्कूल की पढ़ाई के बाद 1962 में सेना में भर्ती हो गए। वर्ष 1971 की बंगला देश लड़ाई में वह शहीद हो गए। उनकी शहादत पर इंदिरा गांधी ने शोक संदेश भेजा था। यह पूरे परिवार ही नहीं गांव केे लिए सम्मान बढ़ाने वाला पल था। खुद भी सेना में रह कर देश सेवा कर चुका हूं।

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