किलोई में जोहड़ों की पिछले पांच साल से सफाई न होने के कारण स्थिति बदतर हो गई है। जोहड़ गंदे पानी के कुंड बन चुके हैं। इससे मवेशियों को नहलाने तक का पानी नसीब नहीं हो रहा है। गंदे और दूषित पानी में जाने से महंगे पशु बीमार हो रहे हैं जिससे ग्रामीणों को नुकसान हो रहा है। ऐतिहासिक और अधिक आबादी वाले गांव में जन समस्या से निपटने में प्रशासन और अधिकारी पिछड़े नजर आ रहे हैं। दूषित जोहड़ के पानी और जल निकासी की खराब व्यवस्था को लेकर महिलाओं में गहरा रोष है। गांव में आज भी चार-चार दिन तक पानी के लिए लोग इंतजार करते हैं। गांव की महिलाएं बताती हैं कि गांव में पानी की किल्लत है। नलों में चार दिन में एक बार पानी आता है। कई बार शिकायत के बावजूद प्रशासन सुध नहीं ले रही है। वहीं, कमल अत्री ने बताया कि गांव में युवाओं के लिए आधुनिक पुस्तकालय नहीं है। जबकि, प्राइवेट पुस्तकालय है। ग्रामीण पवन कुमार, कृष्ण नंबरदार व सुनील हुड्डा ने बताया कि सरकार की ओर से जगमग योजना चलाई जा रही है लेकिन अधिक आबादी होने के बावजूद 4 घंटे बिजली आती है। सबसे से बड़ी जरूरत बिजली की सुचारु व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि रबी फसल कटाई के दौरान तो दिन में बिजली आती ही नहीं थी जबकि सामान्य दिनों में 4 घंटे ही बिजली दी जाती है। गर्मियों में ग्रामीणों को बुरा हाल हो जाता है। गांव के लोग तीन से चार किलोमीटर दूर जाकर पानी लेने जाते हैं। सप्लाई के पानी भी दो से दिन में आता है। प्रशासन को गांव की पानी की सुचारु व्यवस्था के लिए कदम बढ़ाना चाहिए।