नगर परिषद की अनदेखी और सफाई एजेंसी की मनमानी के चलते शहर की कचरा प्रबंधन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। नियमों और प्रतिबंधों के बावजूद शहर का कचरा खुले वाहनों में भरकर रामसिंहपुरा स्थित डंपिंग यार्ड तक पहुंचाया जा रहा है। इससे न केवल शहर की स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है। शहर के 32 वॉर्डों से प्रतिदिन लगभग 100 टन सूखा और गीला कचरा निकलता है। घर-घर से कचरा एकत्र करने के बाद इसे करीब 20 किलोमीटर दूर गांव रामसिंहपुरा में बने डंपिंग यार्ड में डाला जाता है। इस प्रक्रिया में रोजाना 15 से अधिक फेरे लगाए जाते हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि किसी भी कचरा वाहन पर तिरपाल या जाल (नेट) नहीं लगाया गया है। कचरे से भरे खुले वाहन जब मुख्य बाजारों और रिहायशी इलाकों से गुजरते हैं तो तेज हवा चलने या अचानक ब्रेक लगने पर कचरा उड़कर सड़कों पर फैल जाता है। कई बार यह कचरा पीछे चल रहे वाहन चालकों और पैदल राहगीरों पर गिर जाता है। सड़क पर कचरा फैलने से फिसलन की स्थिति बन जाती है, जिससे हादसों की आशंका लगातार बनी रहती है। नागरिकों का कहना है कि नगर परिषद को तुरंत इस पर सख्त कदम उठाने चाहिए, ताकि शहर की सूरत और लोगों की जान दोनों सुरक्षित रह सकें।