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मेरा गांव, मेरी शान: खेल, शिक्षा और देश सेवा में पट्टीकल्याणा का बजा डंका, आजादी से लेकर 1962 की जंग तक गांव ने दिखाई वीरता

समालखा खंड के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक गांव पट्टीकल्याणा ने खेलों, शिक्षा, राजनीति और देश सेवा के क्षेत्र में एक ऐसी अमिट छाप छोड़ी है। इस पर न केवल पानीपत बल्कि पूरे हरियाणा को गर्व है। आजादी की लड़ाई में इस गांव के वीरों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया था। साल 1962 के भारत-चीन युद्ध में इस गांव के पांच रणबांकुरों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। आज भी इस गांव के युवा सेना, प्रशासनिक सेवाओं और खेल के मैदानों में देश का गौरव बढ़ा रहे हैं। पट्टीकल्याणा गांव को यदि खिलाड़ियों की खान कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। विशेषकर वॉलीबॉल और कुश्ती में यहां के युवाओं ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। वॉलीबॉल में गांव के होनहार खिलाड़ी अमित ने भारतीय टीम में जगह बनाकर विदेश में तिरंगा लहराया। इसके अलावा रोशन लाल, ऋषिपाल, जूनियर रोशन, रमेश और राहुल जैसे खिलाड़ियों ने नेशनल लेवल पर शानदार प्रदर्शन कर गांव का नाम रोशन किया। गांव में युवाओं को सही दिशा देने के लिए वॉलीबॉल की विशेष नर्सरी चलाई जा रही है। वहीं, कुश्ती के क्षेत्र में भी गांव पीछे नहीं है। पट्टीकल्याणा में दो अलग-अलग अखाड़ों में लड़कों और लड़कियों को कुश्ती की पेशेवर कोचिंग दी जा रही है। इसी का परिणाम है कि अखाड़े से निकले अंकित ने ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता, जबकि शुभम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड और सिल्वर मेडल पर कब्जा जमाया। प्रिंस और प्रदीप कुमार खेलों में राष्ट्रीय स्तर पर चमक बिखेर चुके हैं। राजनीति और प्रशासनिक सेवाओं में भी शीर्ष पर रहा गांव यह गांव केवल खेल के मैदान तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा और राजनीति के शिखर पर भी पट्टीकल्याणा के ग्रामीणों ने अपनी धाक जमाई है। गांव के स्व. कटार सिंह छौक्कर हरियाणा सरकार में वित्त मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद पर रहे और प्रदेश की आर्थिक नीतियों को दिशा दी। वहीं, युवाओं के नेतृत्व की बात आई तो संजय छौक्कर ने हरियाणा युवा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष के रूप में अपनी नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया। प्रशासनिक सेवाओं में बिमला और घनश्याम ने सिविल सेवा परीक्षा पास कर गांव का नाम ऊंचा किया। शिक्षा के क्षेत्र में जगदीप ने गुजरात यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर पद को सुशोभित किया, तो सैन्य सेवा में कुलदीप सिंह ब्रिगेडियर के पद तक पहुंचे। बैंकिंग सेक्टर में भी गांव के राजकुमार छौक्कर हैदराबाद में एक प्रतिष्ठित बैंक में डिप्टी जनरल मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं। 1962 की जंग में पांच सपूतों ने दिया था बलिदान पट्टीकल्याणा गांव का इतिहास देश प्रेम और शहादत की कहानियों से भरा हुआ है। साल 1962 में जब भारत और चीन के बीच युद्ध छिड़ा, तो इस गांव के जवानों ने मोर्चे पर अदम्य साहस का परिचय दिया। गांव के पांच वीर सपूतों ज्ञान सिंह, रघबीर, अर्जुन, हरि सिंह और पंथीराम ने अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। इन शहीदों की गाथाएं आज भी गांव के बच्चों को सेना में जाकर देश सेवा करने के लिए प्रेरित करती हैं।

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