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पानीपत। 40 साल के संघर्ष व त्याग से बने किसान भवन को सात लोगों ने ट्रस्ट बनाकर हथियाने का रचा षड्यंत्र

सुनील कुमार Updated Thu, 09 Jul 2026 06:42 PM IST

किसानों की समस्याएं उठाने के बजाय अधिकारियों व बिचौलियों का अड्डा बनाने की तैयारी माई सिटी रिपोर्टर पानीपत। पिछले 40 वर्षों के कड़े संघर्ष, त्याग और बुजुर्गों के बलिदान से खड़े किए किसान भवन के अस्तित्व पर संकट गहरा गया है। किसान समाज के कुछ रसूखदार लोगों द्वारा गुपचुप तरीके से एक निजी ट्रस्ट बनाकर ऐतिहासिक किसान भवन पर अवैध कब्जा करने का एक बड़ा षड्यंत्र सामने आया है। इस धोखाधड़ी के उजागर होने के बाद क्षेत्र के किसानों और समाज में भारी रोष व्याप्त है। मामले को लेकर विभिन्न गांवों में बैठकों और महापंचायतों का दौर शुरू हो गया है। किसान भवन के खुद उप प्रधान अनिल कादियान इसके विरोध उतर आए हैं। उन्होंने वीरवार को किसान भवन में बैठक कर 12 जुलाई को होने वाली किसान महापंचायत की तैयारियों पर चर्चा की। इनके साथ युवा किसान नेता सुधार जाखड़, पूर्व प्रधान सुरेश दहिया विशेष रूप से शामिल रहे। उन्होंने कहा कि भवन को कुछ लोगों के हाथ में लेने की पटकथा मार्च महीने में शुरू की। एक गुप्त बैठक की। इसके बाद मई महीने में भारतीय किसान भवन ट्रस्ट नाम से एक ढांचा खड़ा कर दिया गया। साजिश के तहत समाज के केवल सात लोगों ने स्वयं को इस संपत्ति का मालिक घोषित कर दिया है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस गंभीर हेरफेर के बारे में क्षेत्र के उप-प्रधान, युवा प्रधान और ब्लॉक प्रधानों तक को पूरी तरह से अंधेरे में रखा गया और उन्हें इसकी कानों-कान खबर तक नहीं होने दी गई। नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को बांटे पद किसानों का आरोप है कि प्रत्येक किसान इस भवन का बराबर का हिस्सेदार है, लेकिन वर्तमान में तानाशाही रवैया अपनाते हुए सभी नियम-कानून ताक पर रख दिए गए हैं। ट्रस्ट के पांच मुख्य पदाधिकारी केवल एक ही ब्लॉक से बना दिए गए हैं। इसराना और मतलौडा के एक-एक व्यक्ति को शामिल किया। वहीं दूसरी तरफ समालखा, बापौली और सनौली जैसे प्रमुख किसान बाहुल्य क्षेत्रों की पूरी तरह अनदेखी की गई है। किसानों का कहना है कि नवनियुक्त पदाधिकारी किसानों की वास्तविक समस्याओं को उठाने के बजाय केवल अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ सांठगांठ करने में लगे हैं। किसान भूमि का उपयोग अब सामाजिक और कृषि कल्याण के बजाय धार्मिक और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए करने की योजना बनाई जा रही है। किसानों को बाजार से सीधे जोड़ने और बिचौलियों (आढ़तियों) को खत्म करने के काम प्रमुख गिनवाए हैं। किसान भवन में कोल्ड स्टोरेज और व्यापारिक केंद्र में तब्दील करने की साजिश रची जा रही है। पुलिस कार्रवाई की चेतावनी, समाज के बाहर निकालने की मांग किसान नेता सुधीर जाखड़ ने कहा कि इस प्रकार की धोखाधड़ी को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि इस हेरफेर के लिए समाज से सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी गई, तो जालसाजी करने वाले सभी लोगों के खिलाफ पुलिस में धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। सातों में से एक अपनी एक एकड़ जमीन दे दें उप प्रधान अनिल कादियान ने कहा कि कहा कि किसान भवन को कुछ लोगों की निजी जागीर नहीं बनने दिया जाएगा। समाज और किसानों की पीठ में छुरा घोंपने वालों को बाहर निकाल दिया जाएगा। इन सात पदाधिकारियों में से कोई अपनी एक एकड़ जमीन प्रस्तावित ट्रक के सात सदस्यों को देता है तो वे भवन निर्माण के लिए 11 लाख रुपये का चंदा देंगे। प्रधान दिलबाग बिंझौल को शक है तो उनको पूर्व के कार्यकाल का ऑडिट कराकर रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए। इस विवाद के बाद कई गांवों में पंचायतों का आयोजन किया गया है, लेकिन प्रधान दिलबाग सिंह अभी तक किसी भी पंचायत में सामने आने का साहस नहीं जुटा पाए हैं। किसानों ने साफ कर दिया है कि किसान भवन बचाओ अभियान के तहत यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा।

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