दो माह से महेंद्रगढ़ की नगरपालिका राजनीतिक अखाड़ा बनी हुई है। नपा प्रधान, अधिकारियों व पार्षदों की चल रही आपसी खींचतान के चलते दो माह से विकास कार्य ठप्प पड़े हैं। वहीं वीरवार को इस अखाड़े में जिला प्रशासन की भी इंट्री हो गई है। नगरपालिका प्रधान की ओर से अधिकारियों पर विकास कार्याें में अनियमितता, भ्रष्टाचार व धांधली के लगाए गए आरोपों की जांच के लिए उपायुक्त ने डीएमसी को एक सप्ताह का समय दिया है। वीरवार को उपायुक्त अंजलि अनुपमा की ओर से लघु सचिवालय में बंद कमरे में डीएमसी, नगरपालिका के अधिकारियों, प्रधान व पार्षदों की बैठक बुलाई गई। प्रधान की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच के लिए डीएमसी रणबीर सिंह को एक सप्ताह का समय दिया। बता दें कि नगरपालिका के प्रधान रमेश सैनी की ओर से पिछले दो माह के दौरान नगरपालिका के अधिकारियों पर विकास कार्याें में अनियमितता बरतने, गुणवत्ता के नियमों की अनदेखी सहित भ्रष्टाचार व धांधली की आशंका जताते हुए पत्र लिखकर एमई से जवाब मांग था। लेकिन किसी भी पत्र का जवाब नहीं देने पर प्रधान रमेश सैनी दो बार इस्तीफे, एक बार धरना-प्रदर्शन व एमई के कार्यालय पर ताला जड़ने की चेतावनी दे चुके हैं। पिछले दो सप्ताह के दौरान विधायक कंवर सिंह यादव व एसडीएम योगेश सैनी की ओर से बैठक बुलाकर पत्रों के जवाब दिलाने व जांच के आश्वासन दिए जा चुके हैं। वहीं गत मंगलवार को प्रधान ने एमई कार्यालय पर तालाबंदी की चेतावनी दी थी। वीरवार को उपायुक्त अंजली अनुपमा ने बारी-बारी से अधिकारियों, प्रधान व पार्षदों का पक्ष सुना।