देश सरकार के नए विधेयक के अनुसार ग्राम सभाओं में ग्रामीणों की भागीदारी को लेकर अब सरपंचों ने हाथ खड़े कर दिए हैं।सरपंचों का कहना है कि मुनादी, सोशल मीडिया पर सूचना व ग्रामीण स्तर पर विभिन्न प्रयासों के बावजूद भी तय संख्या प्रतिशत में ग्रामीणों की भागीदारी संभव नहीं है। बुधवार को कनीना खंड सरपंच एसोसिएशन की ओर से नायब तहसीलदार को मुख्यमंत्री के नाम पत्र सौंपकर इसे अव्यवहारिक करार दिया है। साथ ही जल्द यह निर्णय वापस नहीं लेने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। सरपंचों का कहना है कि 40 प्रतिशत लोग तो गांवों में होने वाले जीमाड़े में भी नहीं पहुंच रहे हैं। ऐसे में ग्राम सभाओं में यह उपस्थिति कैसे संभव हो पाएगी। प्रदेश सरकार के विधयेक के अनुसार ग्राम की पहली बैठक में 40 दूसरी में 30 व तीसरी बैठक में 20 प्रतिशत भागीदारी अनिवार्य है। लेकिन सरकार के निर्णय का खंड कनीना सरपंच एसोसिएशन ने विरोध कर दिया। ज्ञापन नायब तहसीलदार अर्जुन सिंह को मुख्यमंत्री नायब सैनी के नाम पत्र भेजकर इस निर्णय को तत्काल वापस लेने की मांग की है। ज्ञापन में सरपंचों ने कहा कि सरकार द्वारा ग्राम सभा में निर्धारित प्रतिशत के अनुसार ग्रामीणों की उपस्थिति अनिवार्य करने का निर्णय व्यवहारिक नहीं है। किसी भी गांव में एक ही समय में इतनी बड़ी संख्या में ग्रामीणों का एकत्र होना संभव नहीं हो पाता, जिससे ग्राम सभाओं का आयोजन बाधित होगा।