यादव धर्मशाला महेंद्रगढ़ में आयोजित संवाद कार्यक्रम में वीरांगनाओं ने कहा कि पति की शहादत के बावजूद अपने संघर्षों के दम पर परिवार की सैन्य परंपराओं को जारी रखा है। वीरांगनाओं ने अपने संघर्षों के दम पर अपनी तीन-तीन पीढि़यों को देशसेवा के लिए भारतीय सेना में भेजा है। कार्यक्रम में गांव भगड़ाना निवासी वीरांगना शर्मिला, बवानिया निवासी माया देवी, सिहोर निवासी राजेश देवी व गांव खेड़ी-तलवाना निवासी पुष्पा देवी ने अपने अनुभव सांझा किए। साथ ही भूतपूर्व सैनिक विकास संघ के पदाधिकारियों व पूर्व सैनिकों ने महेंद्रगढ़ क्षेत्र के सैन्य इतिहास व अपने युद्ध के दौरान अनुभवों को सांझा किया। भूतपूर्व सैनिक विकास संघ के अध्यक्ष सुबेदार रामस्वरूप ने कहा कि 1857 की क्रांति से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक यहां के वीरों ने अपने युद्ध कौशल एवं अदम्य साहस का परिचय दिया है। यहां के वीरों ने प्रत्येक युद्ध में दुश्मन के दांत खट्टे किए हैं। महेंद्रगढ़ जिला से करीब एक लाख परिवार भारतीय सेना से जुड़े हुए हैं। युद्ध भूमि में महेंद्रगढ़ जिले के शूरमाओं ने इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज कराया है। वक्ताओं ने कहा कि यहां का इतिहास सैनिकों की वीरगाथाओं से भरा पड़ा है। इतिहास में ऐसा कोई युद्ध नहीं जिसमें महेंद्रगढ़ क्षेत्र के वीरों ने अपना नाम दर्ज न कराया हो। वहीं पूर्व सैनिकों ने कहा कि सामाजिक संस्थाएं समय-समय पर पूर्व सैनिकों को सम्मान दें ताकि युवा पीढ़ी भी प्ररेणा ले सके।