एडीजे कोर्ट ने निचली अदालत के आंशिक डिक्री के फैसले को रद्द करते हुए वादी शारदा देवी के हक में फैसला सुनाया है। साथ ही प्रतिवादी को एक माह के भीतर विवादित भूमि की रजिस्ट्री करवाने का आदेश दिया है। जानकारी के अनुसार प्रतिवादी विक्रम ने 9 मई 2012 को गांव मुकुंदपुरा में स्थित अपनी जमीन को 4,00,000 में बेचने का समझौता किया था। वादी शारदा देवी ने उसी दिन 3,75,000 रुपये बयाने के रूप में दे दिए थे। रजिस्ट्री की तारीख पहले 3 अगस्त 2012 तय थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 3 मई 2013 कर दिया गया। वादी तय तारीख पर तहसील कार्यालय पहुंचीं, लेकिन प्रतिवादी रजिस्ट्री कराने नहीं आया। इसके बाद मामला न्यायालय में पहुंचा। जहां सुनवाई के दौरान निचली अदालत के सिविल जज ने वादी शारदा देवी के दावे को केवल आंशिक रूप से स्वीकार किया था, जबकि वादी चाहती थीं कि उनके पक्ष में संपत्ति के विशिष्ट निष्पादन की डिक्री पूरी तरह से पारित की जाए। इसके बाद 17 जनवरी 2018 को वादी ने उक्त फैसले के खिलाफ एडीजे कोर्ट में याचिका दायर की थी। जिस पर सुनवाई के दौरान गवाहों और डीड राइटर के बयानों से यह साबित हुआ कि समझौता और पैसों का लेनदेन सही था। न्यायालय ने पाया कि समझौते में मामूली ओवरराइटिंग केवल तारीख/वर्ष पर थी, जो अनुबंध की मुख्य शर्तों को प्रभावित नहीं करती। न्यायालय ने वर्ष 2014-15 की जमाबंदी और म्यूटेशन नंबर 2037 को रिकॉर्ड पर लिया, जिससे यह सिद्ध हो गया कि प्रतिवादी विवादित जमीन का मालिक था व वादी ने कुल राशि का बड़ा हिस्सा 3,75,000 पहले ही दे दिया था और वह हमेशा रजिस्ट्री के लिए तैयार थी। इसके बाद एडीजे नितिन राज ने निचली अदालत के आंशिक डिक्री के फैसले को रद्द कर दिया।