नारनौल शहर की अग्रवाल सभा में दूसरे दिन भी संगीतमय श्री मद्भागवत कथा का आयोजन हुआ। व्यास पीठ से दादूसंप्रदाय के महंत रामझूलन दास महाराज ने भागवत कथा में बताया कि श्रीमद् भागवत साक्षात नारायण का स्वरूप है और मुक्ति प्रदाता है। भागवत के आरंभ में सबसे पहले सत्य को प्रणाम किया गया है क्योंकि सत्य में ही राम, सत्य में ही कृष्ण और सत्य में ही शिव है। इसलिए लिखा है सत्यम शिवम सुंदरम। महंत ने बताया कि घर परिवार का पालन पोषण करना हमारा धर्म है, लेकिन हमारी हर एक श्वास में प्रभु का नाम स्मरण होता रहे यही मानव जीवन का परम धर्म है। भागवत में मुख्य रूप से भगवान के 24 अवतारों का वर्णन किया गया है। इसके बाद महाराज ने शुकदेव जन्म और परीक्षित के जन्म की, कलियुग आगमन, कुंती स्तुति, भीष्म पितामह द्वारा देह त्याग, राजा परीक्षित को संत के श्राप और शुकदेव आगमन की कथा सुनाई। महाराज ने बताया कि भगवान नारायण की आज्ञा से ब्रह्मा ने सृष्टि का निर्माण आरंभ किया और सर्वप्रथम दस प्रकार की सृष्टि वर्णन किया।