सतनाली कस्बे के बाबा भैरू मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मणी के दिव्य विवाह प्रसंग का अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ आयोजन किया गया। कथा वाचक मोहित दास खेड़ी तलवाना ने बताया कि सच्ची श्रद्धा, अटूट विश्वास और निष्काम प्रेम से भगवान सदैव अपने भक्तों की पुकार सुनते हैं। मोहित दास ने कथा में बताया गया कि विदर्भ की राजकुमारी रुक्मणी ने भगवान श्रीकृष्ण को अपने आराध्य के रूप में स्वीकार किया था। जब उनके विवाह का निर्णय शिशुपाल के साथ किया गया, तब उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को संदेश भेजकर अपनी रक्षा की प्रार्थना की। भगवान श्रीकृष्ण ने रुक्मणी का हरण कर उनका विधिवत विवाह किया। इस प्रसंग के माध्यम से कथा वाचक ने कहा कि धर्म और सत्य की सदैव विजय होती है तथा भगवान अपने भक्तों का कभी साथ नहीं छोड़ते।