शहर नई मंडी स्थित अग्रवाल सभा में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस पर आचार्य मनीष शास्त्री ने मुख्य यजमान से सभी देवताओं का पूजन करवाया। इसके बाद भागवत कथा का शुभारंभ करवाया। इसके उपरांत आचार्य बजरंग शास्त्री ने बताया कि भगवान कृष्ण का जन्म दुष्टों के संहार एवं संतों ब्राह्मणों की रक्षा के लिए हुआ। उन्होंने बताया कि जब धर्म की हानि होती है और अधर्म को बढ़ावा मिलता है तो प्रभु विभिन्न अवतार लेकर पृथ्वी पर आते हैं। आचार्य ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ। बजरंग शास्त्री ने बताया कि कृष्ण जन्म के बारे में सुनते ही गोकुल में बधाई बंटने लगी। श्री कृष्ण भगवान का जन्म होते ही कंस को बहुत चिंता होने लगी। कंस ने कृष्ण को मारने के लिए पूतना राक्षसी को भेजा, वे कृष्ण भगवान को मारने के लिए अपने स्तन पर जहर लगाकर दूध पिलाने लगी। किंतु कृष्ण भगवान दूध के साथ उसके प्राण को खींचने लगे। इस प्रकार कृष्ण ने पूतना को परम धाम पहुंचाया। कंस के द्वारा भेजे गए अनेक राक्षस जैसे बकासुर, धेनूकासूर, वत्सासुर, अघासुर आदि का श्री कृष्ण ने उद्धार किया। आचार्य ने श्री कृष्ण की पावन माखन चोरी की लीला का भी बहुत सुंदर वर्णन किया। भगवान श्री कृष्ण ने इंद्र का अभिमान दूर करने के लिए गोवर्धन धारण की पावन लीला की। कथा के अंत में गोवर्धन जी की सुंदर कथा का वर्णन किया। आचार्य पंडित मनीष निर्मल शास्त्री ने मुख्य यजमान अरुण शर्मा एवं टीना शर्मा और समस्त शर्मा परिवार से गिरिराज का पूजन करवाया। इस अवसर पर मुख्य यजमान समस्त मंगल परिवार सहित, प्रमुख समाजसेवी वैद्य किशन वशिष्ठ, शिव कुमार मेहता, सुरेंद्र गोयल, राकेश बंसल, राजेंद्र गुप्ता, गोपाल मित्तल, विजय जिंदल, विनोद चौधरी, राजकुमार यादव एडवोकेट, सुमित अग्रवाल, प्रदीप संघी, महेश भालोठिया, विनोद सोनी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।