इससे पूर्व 2025 में सर्दियों के दौरान भी पाए गए थे एक्सपायर संवाद न्यूज एजेंसी नारनौल। जिले वासियों के लिए सरकार की प्रत्येक योजनाओं को धरातल पर उतारने से लेकर उनकी छोटी से छोटी जरूरतों व सुरक्षा का ध्यान रखने वाला प्रशासन ही अपनी सुरक्षा के प्रति भी लापरवाह हो सकता है, ये बात समझ से परे है। हालांकि भूलवश ऐसा हो भी जाए तो समझ में आता है, लेकिन एक ही गलती लगातार दो बार हो जाए तो प्रतीत होता है कि प्रशासन की नींद भी चेताने से ही खुलती है। इस साल 25 जून को लघु सचिवालय में आयोजित समाधान शिविर की पड़ताल के दौरान परिसर में लगे सभी अग्नि शमन यंत्र पर नजर डाली गई तो वे सभी मार्च माह में ही एक्सपायर पाए गए। जबकि इस बात से अनजान प्रशासनिक अधिकारी तीन माह से नींद में सोए रहे, जबकि लघु सचिवालय में प्रतिदिन हजारों की तादाद में आमजन से लेकर अधिकारी व कर्मचारी काम करते हैं। ऐसे में यदि आगजनी की कोई घटना घट जाती तो इसकी जिम्मेदारी क्या जिम्मेदार उठाते, ये सोचने वाली बात है। प्रमुखता से उठाया था मुद्दा: इस संबंध में 26 जून को अमर उजाला के अंक में प्रकाशित समाधान के आश्वासनों के बीच अटके फरियादी शीर्षक नामक समाचार में इस मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया गया था। इसी का ही परिणाम है कि अब अधिकारी ने सभी एक्सपायर अग्नि शमन यंत्रों को रिफिल कराने के लिए भेज दिया है। बॉक्स: गौरतलब है कि मई 2024 में लघु सचिवालय की चौथी मंजिल पर बने एनआईसी व आबकारी विभाग के कार्यालय में आग लग गई थी। प्रथम दृष्टया में आग शाॅर्ट सर्किट की वजह से लगी बताई गई थी। आग लगने के बाद दमकल की चार गाड़ी मौके पर पहुंची और करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। हालांकि इससे पहले एनआईसी कार्यालय का सारा सामान लगभग जलकर राख हो चुका था। वर्जन: सारे यंत्र मार्च में एक्सपायर हो चुके थे, ऐसे में उन सभी को रिफिल करवाने के बारे में लिखा गया था। दो से तीन दिन में सभी अग्निशमन यंत्र रिफिल होकर आ जाएंगे। जिसके बाद उन्हें वापस उनके स्थान पर लगाया जाएगा। डॉ. मंगल सेन, नगराधीश, नारनौल।