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नारनौल में रोजाना 10 लोगों को काट रहे कुत्ते, 6 माह में 1960 लोगों ने लगवाए रेबीज के टीके; अब टेंडर हुआ समाप्त

शहर की गलियों में घूम रहे आवारा कुत्ते लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गए हैं। शहर और गांवों में प्रतिदिन औसतन 10 लोग कुत्तों के काटने का शिकार हो रहे हैं। वहीं 6 माह में 1960 लोगों ने रेबीज का टीका लगवाया है। इसके अलावा आवारा कुत्ते अक्सर दोपहिया और अन्य वाहनों के पीछे दौड़ पड़ते हैं, जिससे सड़क हादसों का खतरा भी बढ़ गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जनवरी माह में नगर परिषद ने शहर में आवारा कुत्तों को पकड़कर उनका बधियाकरण और एंटी रेबीज टीकाकरण अभियान शुरू किया था। इस दौरान करीब 1550 कुत्तों को एंटी रेबीज के टीके लगाए गए और उनका बधियाकरण किया गया। हालांकि यह अभियान कुछ ही महीनों में ठप पड़ गया, क्योंकि संबंधित एजेंसी का टेंडर समाप्त हो गया। इसके बाद से कुत्तों को पकड़ने और उनका टीकाकरण करने का कार्य बंद है। जिले में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर करीब 10 से 11 हजार आवारा कुत्ते हैं, लेकिन इनमें से केवल लगभग 10 प्रतिशत का ही एंटी रेबीज टीकाकरण हो पाया है। ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत स्तर पर अब तक न तो बधियाकरण अभियान शुरू किया गया है और न ही एंटी रेबीज टीकाकरण। कई गांवों में एक ही आवारा कुत्ते द्वारा पांच से सात लोगों को काटने के मामले सामने आए हैं। इसके बावजूद व्यापक स्तर पर अभियान शुरू नहीं होने से लोगों में नाराजगी है। कुत्ते के काटने से सबसे गंभीर और जानलेवा बीमारी रेबीज होती है। इसके अलावा, घाव में बैक्टीरिया के संक्रमण से टिटनेस या सेप्सिस होने का खतरा भी रहता है। इसलिए आमजन से अपील है कि कुत्ते के काटने पर तुरंत प्रभाव से रेबीज के टीके लगवाने चाहिए। -डॉ. सरजीत, आरएमओ, नागरिक अस्पताल, नारनौल। 1550 कुत्तों को एंटी रेबीज टीके लगाने व बधियाकरण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसे पूरा कर लिया गया है। जिस एजेंसी द्वारा कार्य किया जा रहा था, उसकी अवधि समाप्त हो चुकी है। -विकास, जेई, नगर परिषद, नारनौल।

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