गांव बाघोत के बागेश्वर धाम में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन शिव-पार्वती के विवाह की झांकियां निकाली गई। इस दौरान भजनों पर श्रद्धालु जमकर झूमे। कथा व्यास आचार्य राकेश कृष्ण शास्त्री ने शुकदेव परीक्षित संवाद का वर्णन किया। बताया कि किस प्रकार कलयुग के वशीभूत होकर महान धर्मात्मा राजा परीक्षित ने ऋषि के गले में मरा हुआ सांप डाल दिया था। क्रोधित ऋषि पुत्र श्रृंगी ने श्राप दिया था कि सातवें दिन तक्षक नाग उन्हें डस लेगा। कथा के माध्यम से उन्होंने समाज को संदेश दिया कि बड़े-बड़े कष्ट मां जगत जननी के पास लोग ले जाते हैं। देवी-देवताओं की पूजा करते हैं। लेकिन जगत जननी भी यही कहती है कि यदि घर में मां भूखी बैठी हो तो यहां प्रसाद चढ़ाने का कोई फायदा नहीं। जिस घर में मां बाप की सेवा होती है वहां भगवान भी खुश होते हैं। भागवत कथा में शिव पार्वती की झांकी का मनमोहक दृश्य दिखाए गए। झांकी में दिखाया कि पार्वती शंकर के पास जाती हैं और उनके गले में फूलों की वरमाला डाल देती हैं। इस दौरान शिवजी के बरात में शामिल भूत पिशाच का नृत्य, विवाह उपरांत शिवजी का भस्म होली प्रस्तुति हुई। इस दौरान कृष्ण शास्त्री नांवां, मास्टर पुरुषोत्तम, राजकुमार, मनोज, विकाश अत्री, मनीष, प्रिंस, दीपांशु, विकाश, सचिन, प्रेरणा, मधुबाला, सरोज, रजनी, सुनीता, देवकी, राजबाला सहित अन्य मौजूद रहे।