चार दिन बाद आखिरकार मारकंडा का जलस्तर लगातार घटने लगा, जिसके बाद ग्रामीणों व प्रशासनिक अधिकारियों ने राहत की सांस ली। वीरवार शाम तक शाहाबाद में करीब पांच बजे तक 7566 क्यूसेक जलस्तर रह गया जबकि पहाड़ों में बारिश रूक जाने के चलते रात को यह और भी कम होने की उम्मीद जताई गई। वहीं खेतों से भी पानी उतरने लगा तो बर्बादी के निशान भी दिखाई देने लगे। कहीं सड़कें खस्ताहाल तो कहीं फसलें ही पानी की मार में बर्बाद हो गई। प्रशासन के मुताबिक प्रारंभिक तौर पर 2300 एकड़ फसल में नुकसान की आशंका जताई गई है जबकि ग्रामीणों की मानें तो आंकड़ा इससे दो से तीन गुना तक हो सकता है। जल्द क्षतिपूर्ति पोर्टल भी खोले जाने का किसानों को भरोसा दिया गया है, जहां बर्बाद फसल की जानकारी दर्ज कर सकेंगे। उधर हालात सामान्य होने लगे तो वीरवार को विधायक रामकरण काला से लेकर भाजपा नेता सुभाष कलसाना व नवनियुक्त जिला उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा, एसडीएम चिनार चहल, अभिनव सिवाच ने जायजा लिया, जहां किसानों को स्थाई समाधान तलाश करने व नुकसान के भरपाई का भरोसा दिया। उन्हें किसानों का गुस्सा भी झेलना पड़ा। किसानों ने रोष जाहिर करते हुए कहा कि इस बर्बादी का स्थाई समाधान किए जाने की जरूरत है।