श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के इतिहास में एक सुनहरा अध्याय जुड़ गया है। विश्वविद्यालय का पहला दीक्षांत समारोह भव्य रूप से आयोजित किया गया, जिसमें 126 स्नातक और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। समारोह में विद्यार्थियों के चेहरों पर भविष्य के प्रति उत्साह और आत्मविश्वास झलक रहा था। कार्यक्रम की अध्यक्षता हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने की, जबकि आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने बतौर मुख्य अतिथि समारोह की गरिमा बढ़ाई। इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य, पद्मविभूषण, पद्मश्री और राज वैद्य देवेंद्र त्रिगुणा को मानद उपाधि देकर सम्मानित किया गया। दीक्षांत समारोह में 26 स्वर्ण पदक विजेताओं को मंच पर सम्मानित किया गया, जिनमें से 23 छात्राएं थीं। इससे समारोह में महिला सशक्तिकरण की झलक साफ देखने को मिली। यह दर्शाता है कि आयुष चिकित्सा क्षेत्र में भी महिलाएं अब अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। सभी विद्यार्थियों ने भारतीय पारंपरिक परिधान में डिग्री ग्रहण की, जिससे समारोह में सांस्कृतिक गरिमा का विशेष माहौल बना रहा। विद्यार्थियों और उनके परिवारों के चेहरों पर गौरव और प्रसन्नता देखने योग्य थी। समारोह में वक्ताओं ने आयुष चिकित्सा पद्धति के महत्व, भविष्य की संभावनाओं और भारत के पारंपरिक चिकित्सा विज्ञान को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में युवाओं की भूमिका पर बल दिया।