सीआरएसयू के एमबीए विभाग में पीएचडी में चार सीटों पर 12 विद्यार्थियों का दाखिला कर भ्रष्टाचार करने के आरोप लगाकर छात्र संगठन एबीवीपी ने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रोफेसर डॉ. जयवीर सूरा के कार्यालय के बाहर जहां सूरा वहां समस्या, पीएचडी स्कैम, शिक्षा के दलालों पर कार्रवाई के पोस्टर चिपका दिए। घटना के समय प्रोफेसर कार्यालय में मौजूद नहीं था। इस दौरान विद्यार्थियों ने जमकर हंगामा किया। एबीवीपी के छात्र नेता रोहन सैनी ने आरोप लगाए कि प्रोफेसर डॉ. जसवीर सूरा ने एमबीए विभाग में चार सीटों पर 12 विद्यार्थियों को दाखिला दिया। इसमें पूरी तरह से भ्रष्टाचार किया गया है। बाद में छह विद्यार्थियों को फेल कर दिया। इसमें एक छात्रा वह भी फेल की गई। जिनका चार बार जेआरएफ पास हुआ है और दो बार यूपीएससी की परीक्षा भी पास की है। इस घोटाले की जानकारी के लिए उन्होंने आरटीआई भी लगाई, लेकिन उनको सही जवाब नहीं दिया जा रहा। इसको लेकर उन्होंने विजिलेंस से जांच करवाने की मांग की है। इस तरह घोटाले के लगे आरोप सीआरएसयू के एमबीए विभाग में पीएचडी में हुए दाखिले में घोटाला करने के आरोपों में बताया गया है कि दाखिले के लिए चार सीटों पर विज्ञापन प्रकाशित करवाया गया। चार दाखिले होने के बाद बिना नोटिस या विज्ञापन के सात दाखिले कर दिए। सभी दाखिले सामान्य वर्ग की श्रेणी के हुए। बीसी कोटे की सीट बिना किसी नोटिफिकेशन के जनरल में बदल दी गई। इसमें एक बीसी वर्ग का उम्मीदवार भी था, लेकिन उसको भी सीट नहीं दी गई। इसके बाद जब बीसी वर्ग के विद्यार्थी ने इस बात पर एतराज उठाया तो मामला उजागर होने से बचाने के लिए एक सीट फिर बढ़ाकर बीसी वर्ग के छात्र को दाखिला दे दिया। इसके बाद दाखिला संख्या 12 हो गई। परिणाम भी सार्वजनिक नहीं किया गया इसमें आरोप हैं कि जिन छात्रों की प्रवेश परीक्षा ली थी, उनके परिणाम को भी सार्वजनिक नहीं किया गया। विश्विद्यालय के अन्य सभी विभागों में पीएचडी की प्रवेश परीक्षा के परिणाम को सार्वजनिक किया जाता है। इसमें सरकार के रिजर्वेशन रोस्टर की पालना नहीं करने के भी आरोप हैं। प्रबंधन विभागाध्यक्ष पर हर शोधार्थी के साथ उनकी बिना इच्छा के सह-सुपरवाइजर लगाने के आरोप हैं, ताकि निर्धारित से ज्यादा दाखिलों को एडजस्ट किया जा सके। इसमें आरोप लगाया कि एक सुपरवाइजर तो विभागाध्यक्ष की पत्नी है। विश्वविद्यालय के संसाधनों का निजी स्वार्थ पूरे करने के लिए प्रयोग किया जा रहा है। इसके अलावा विश्वविद्यालय की परीक्षा शाखा के कर्मचारी का पीएचडी में दाखिला भी गलत तरीके से करने के आरोप लगाए हैं। विद्यार्थियों ने पीएचडी दाखिले में भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर पोस्टर लगाने की जानकारी मिली है। इस मामले में कार्रवाई के लिए तीन सदस्यों की जांच कमेटी बनाई हुई है, जो मामले की जांच कर रही हैं। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर इसमें आगामी कार्रवाई की जाएगी। विजलेंस जांच की मांग पर रजिस्ट्रार ने कहा इस बारे में विद्यार्थी उनसे नहीं मिले। पहले यूनिवर्सिटी की कमेटी की प्रारंभिक जांच होंगी। ---डॉ. लवलीन मोहन रजिस्ट्रार सीआरएसयू