डीसी स्वप्निल रविंद्र पाटिल ने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण है। अब युद्ध की परिभाषा बदल गई है और आर्थिक युद्ध तथा साइबर युद्ध भी इसके रूप हैं। युद्ध का असर सीधे जनता पर पड़ता है। यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भी प्रभावित करता है। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे केवल सामान्य डिग्री के भरोसे पर न रहें बल्कि विशेषज्ञता हासिल करें। वह बुधवार को राजकीय स्नातकोत्तर नेहरू महाविद्यालय में रक्षा अध्ययन विभाग, एनसीसी, पूर्व विद्यार्थी संगठन और गवांड फाउंडेशन भदानी के संयुक्त तत्वाधान में रक्षा एवं सामरिक विषयों पर राष्ट्रीय संगोष्ठी ''समर संवाद'' को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में सीआरपीएफ के रिटायर्ड एडीजी जेएस गिल विशिष्ट अतिथि रहे। प्राचार्य प्रो. दलबीर सिंह ने इनका अभिनंदन किया और संगोष्ठी की रूपरेखा प्रस्तुत की। अपने संबोधन में डीसी ने कहा कि इस बात पर विचार करें कि देश के लिए हम क्या कर सकते हैं। वर्ष 2047 के विकसित भारत की बागडोर आज की पीढ़ी के हाथ में ही होगी। संगोष्ठी के पहले सत्र में मेजर जनरल सुधीर जाखड़ ने कहा कि सोशल मीडिया पर आने वाली चीजों को रिजेक्ट किया जाना चाहिए। उसे शेयर नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि साइबर सिक्योरिटी के माध्यम से लोगों को गुमराह किया जा रहा है। एआई से भी लोगों को नुकसान हो रहा है। क्रिप्टो कंरसी के बारे में भी लोगों के पता नहीं है, इस बारे में भी लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। वहीं, अर्चना त्यागी ने ‘2026 में भारत की आंतरिक सुरक्षा की गतिशीलता, माओवादी अंत से उभरते हाइब्रिड खतरों तक'' विषय पर चर्चा की। वाणिज्य प्राध्यापक डॉ. श्रीकृष्ण दूहन ने चर्चा का संचालन किया।