फाग का खेल प्राचीन काल से ही हमारे लोक जीवन में रचा बसा है। नितानंद महाराज ने भी अपने गुरु गुमानी दास के आदेश से जटेला धाम में अध्यात्म की होली खेली थी, जिससे तप करके एसा भक्ति साहित्य तैयार किया। आज भी मानवता का मार्गदर्शन कर रहा है। ये उद्गार जटेला धाम के धूलैंडी मेले पर साध संगत को संबोधित करते हुए पीठाधीश्वर राजेंद्र दास महाराज ने व्यक्त किए। महंत राजेंद्र दास ने कहा कि जटेला धाम आदिकाल से ही अध्यात्म का केंद्र रहा है। साध संगत के आशीर्वाद से आयुर्वेद चिकित्सा का अंतरराष्ट्रीय हब बनने जा रहा है। आयुर्वेद चिकित्सालय चिकित्सा के साथ-साथ शोध का भी विश्वस्तरीय संस्थान होगा। यहां पर भारत ही नहीं बल्कि विदेशों की मानवता को रोग मुक्त रखने का इंतजाम किया जाएगा तथा इस संस्थान के निर्माण में योगदान देने वाले दानवीरों का नाम चिकित्सा के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। हमारे सनातन में रोगियों की सेवा सबसे बड़ा पुण्य है। इस संत-समागम को संबोधित करते हुए राजेंद्र दास महाराज ने कहा कि जटेला धाम का आयुर्वेद संस्थान मानवता की सेवा करता रहेगा।आरोग्य सेवा सबसे बड़ा परहित है। किसी रोगी के रोग की पीड़ा खत्म करना, सबसे बड़ा अराधनीय कार्य है। चिकित्सा संस्थान में दिया गया दान सोने के मंदिर से से कई गुना पुण्यदायी होगा। जटेला धाम में तो दवा और दुवा दोनों मिलेंगे और आयुर्वेद संस्कार का सबसे बड़ा केंद्र होगा यह आयुर्वेद संस्थान। कुंवर सिंह महाराज दिनोद वाले ने कहा कि सामाजिक समरसता और आरोग्य का जटेला धाम ही सबसे बड़ा उपासना स्थल है। उन्होंने चिकित्सा संस्थान के लिए साध संगत को बधाई दी। रामानंद महाराज ने कहा कि जटेला धाम अब भविष्य में अध्यात्म की राजधानी के साथ-साथ आयुर्वेद चिकित्सा का भी पूजनीय धाम बनेगा। साध्वी राधागिरी महाराज वृंदावन ने मातृशक्ति को भी परोपकार के कार्य में आगे आने का आह्वान किया।