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झज्जर में धूमधाम से मनाया गया होलिका पर्व

शाहिल शर्मा Updated Mon, 02 Mar 2026 04:37 PM IST

होली भारत में हिंदुओं का बहुत बड़ा पर्व है। हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर होलिका दहन के अगले दिन होली मनाई जाती है। इस बार 3 मार्च को चंद्र ग्रहण लग रहा हैं, जिस कारण रंग बिरंगी होली चार मार्च को खेली जाएगी। होलिका दहन सोमवार को किया गया और 4 मार्च को रंगों वाली खेली जाएगी। जिलाभर में सोमवार को होलिका पर्व धूमधाम से मनाया गया। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में होलिका दहन के लिए लकड़ियों, कंडे आदि एकत्रित किए गए थे। प्रात: से ही होलिका पूजन के लिए महिलाओं का तांता लगना शुरू हो गया था। महिलाएं परंपरागत वेशभूषा में होलिका पूजन करने के लिए पहुंची। होलिका दहन के दिन सोमवार को शहर में कई स्थानों पर महिलाओं ने होली का पूजन अर्चन किया। पूजा के दौरान महिलाओं ने कच्चा सूत लपेटकर परिक्रमा की और नई फसल के दाने अर्पित किए। कई स्थानों पर सामूहिक रूप से भजन कीर्तन का आयोजन किया गया। बेरी गेट शिव मंदिर शिव मंदिर के देवाचार्य सुनील दत शास्त्री ने बताया कि हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को होलिका दहन किया जाता है। सनातन धर्म में होलिका दहन का खास महत्व है। मान्यता है कि होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत और भक्ति का प्रतीक हैं। शिव मंदिर के सामने महिलाओं ने होलिका की विधिवत रूप से पूजा-अर्चना की और अपनी संतानों की दीर्घायु के लिए होलिका से कामना भी की। छोटे बच्चे काजू, किशमिश, नारियल व मेवों से बनी मालाएं पहनकर पूजा-अर्चना के लिए आए। उनकी माताओं ने बच्चों का होलिका पर माथा भी टिकवाकर प्रार्थना की। महिलाओं ने होलिका का व्रत भी रखा और घरों में पकवान आदि भी बनाए। बाजारों में उपलों की मालाओं की भी खूब बिक्री हुई। उपलों से बनी इन मालाओं को होलिका को अर्पित किया गया। बाजारों में भी होली पर्व की धूम दिखाई दी। पिचकारी, गुलाल से शहर का मुख्य बाजार में रौनक दिखाई दी। बच्चों ने पिचकारियां व गुब्बारे आदि भी खूब खरीदे। होलिका दहन को छोटी होली के नाम से जाना जाता हैं।

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