कुलपतियों के 49वें सम्मेलन में विकसित भारत 2047: कृषि संस्थानों की भूमिका पर मंथन किया गया। कृषि में तकनीक को बढ़ाने पर देश भर के कुलपतियों में सहमति बनी। सभी कुलपतियों ने फैसला लिया कि एक संस्थान में हो रहे शोध को दूसरे संस्थानाें के साथ साझा करेंगे। प्रथम सत्र में डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ अकोला के कुलपति डॉ. शरद रामराव गडाख ने किसानों की आय दोगुनी करने का मॉडल प्रस्तुत किया। वसंतराव नाइक मराठवाड़ा कृषि विद्यापीठ परभणी के कुलपति प्रो. इन्द्र मणि ने ‘एक लचीले कल के लिए जलवायु-स्मार्ट खेती’ पर अपने विचार रखे। उत्पादन लागत को कम करने और उत्पादकता बढ़ाने के लिए छोटे किसानों के लिए खेत पर मशीनीकरण बढ़ाने का प्रस्ताव रखा। समन्वित कृषि प्रणाली मॉडल का विकास, कम से कम इंसानी दखल के साथ खेती को सपोर्ट करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस/डिजिटल प्लेटफॉर्म, फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना और प्रोसेसिंग का अनुपात बढ़ाने जैस बिंदुओं को अपनाने पर विशेष जोर दिया गया। असम कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति एवं सत्र के को चेयरमैन डॉ. बिद्युत चंदन डेका ने भी अपने विचार रखे। दूसरे सत्र में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बलदेव राज काम्बोज ने कहा कि खाद्य सुरक्षा, किसानों की समृद्धि और सतत विकास के लिए अनुसंधान, शिक्षा और विस्तार को मजबूत करना एक राष्ट्रीय आवश्यकता है। उन्होंने नई शिक्षा नीति-2020 को लचीली, बहु-विषयक, अनुसंधान-उन्मुख और समावेशी कृषि शिक्षा, किसान-केंद्रित, बाजार-लिंक्ड और डिजिटल रूप से सक्षम बताया।