सरकारी स्कूलों को बेहतर, सुरक्षित और स्वच्छ शैक्षणिक वातावरण देने के उद्देश्य से जारी किया गया रंग-रोगन और मरम्मत का विशेष बजट अब खुद सवालों के घेरे में आ गया है। हिसार जिले के 27 सरकारी स्कूलों के लिए करीब 63 लाख रुपये का फंड स्वीकृत किया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यह राशि न तो पूरी तरह और न ही गुणवत्ता के साथ खर्च होती नजर आ रही है। कई स्कूलों में हाल ही में किया गया पेंट 10 से 15 दिन में ही दीवारों से उतरने लगा है, जिससे पूरे काम की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। अधिकतर स्कूलों में पुराने पेंट को हटाए या दीवारों की सही सफाई किए बिना ही नया पेंट चढ़ा दिया गया। नियमों के अनुसार जहां दो कोट पेंट जरूरी हैं, वहां अधिकांश जगहों पर केवल एक ही कोट किया गया। कई स्कूलों में पहला कोट सूखने से पहले ही दूसरा कोट कर दिया गया, जिसके चलते पेंट टिक नहीं पाया और कुछ ही दिनों में झड़ने लगा। मरम्मत कार्य की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। जिन स्थानों पर प्लास्टर टूटा हुआ था, दीवारों में दरारें थीं या छतों में सीलन की समस्या थी, वहां मरम्मत किए बिना ही पेंट कर दिया गया। कहीं फर्श और दरवाजों की मरम्मत को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। इस लापरवाही के कारण स्कूलों में मेंटीनेंस कार्य केवल कागजी कार्रवाई बनकर रह गया है। पीएमश्री स्कूल गंगवा में 15 दिन पहले किया गया पेंट अब सीलन के कारण झड़ने लगा है। स्कूल की कई दीवारें और बरामदे पहले से टूटे हुए हैं, जिनकी मरम्मत नहीं की गई। पुराने पेंट के ऊपर बिना सफाई के दोबारा पेंट कर दिया गया, जबकि कुछ हिस्सों को बिना पेंट किए ही छोड़ दिया गया। गौरतलब है कि इस स्कूल को जिले में सबसे अधिक 5.76 लाख रुपये का फंड मिला था।