हांसी जिले के भकलाना गांव की बेटी तनु शर्मा ने स्लोवाकिया में आयोजित अंडर-20 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में 72 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक जीतकर देश और हरियाणा का नाम रोशन किया है। तनु ने चैंपियनशिप में भारत को पहला पदक दिलाया।उनकी इस उपलब्धि के बाद भकलाना गांव सहित पूरे हांसी क्षेत्र में खुशी की लहर है। इस चैंपियनशिप में भारत को 6 मैडल मिले है। इसमें से एक तनु शर्मा का है। आपको बता दे कि विश्व मंच पर शानदार प्रदर्शन के बाद आज तनु के गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने उनका जोरदार स्वागत किया। गांव के बड़ी संख्या में लोग स्वागत समारोह में शामिल हुए और तनु को फूलमालाएं पहनाकर बधाई दी। गांव के बुजुर्गों ने भी बेटी को आशीर्वाद दिया। यह तनु का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहला पदक है। इससे पहले वह राष्ट्रीय स्तर पर पांच पदक अपने नाम कर चुकी हैं। खेलो इंडिया में भी तनु पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दे चुकी हैं। इस मुकाम के पीछे करीब 10 साल की कड़ी मेहनत, नियमित अभ्यास और अनुशासन है। तनु के भाई विष्णु उगालन ने बताया कि तनु को बचपन से ही खेलों में विशेष रुचि थी। कुश्ती के प्रति उसकी प्रतिभा को देखते हुए चाचा और भारतीय सेना से सेवानिवृत्त नरेंद्र शर्मा ने उसे आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। सातवीं कक्षा से तनु ने कोच संजय सिहाग के मार्गदर्शन में कुश्ती का प्रशिक्षण शुरू किया। हिसार स्पोर्ट्स सेंटर के कोच सुनील ढुल ने बताया कि तनु ने करीब 10 साल तक लगातार कड़ी मेहनत की है। शुरुआत से ही उसके अंदर खेलों को लेकर जुनून दिखाई देता था। उन्होंने कहा कि आज बेटी की मेहनत का फल देखकर उनका सीना गर्व से चौड़ा हो गया है। तनु ने अपने स्वागत को लेकर एक दिलचस्प बात साझा की। उसने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के बाद भी उसने कभी कोई बड़ा स्वागत नहीं करवाया था। उसका सपना था कि जब वह विदेश से जीतकर लौटे और जहाज का सफर तय करके गांव पहुंचे, तब उसका जोरदार स्वागत हो। तनु ने बताया कि विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने के बाद उसने फोन पर अपने पिता से कहा था, “पापा, अब मैं जहाज में बैठकर आऊंगी, मेरा स्वागत करना।” रविवार को गांव में हुए भव्य स्वागत के साथ उसका यह सपना भी पूरा हो गया। कुश्ती के शुरुआती प्रशिक्षण के बाद हिसार स्पोर्ट्स सेंटर के कोच सुनील ढुल और राजेश नांदल ने भी तनु की प्रतिभा को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नियमित अभ्यास, अनुशासन और कड़ी मेहनत के दम पर तनु ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई और अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी तिरंगा लहरा दिया। कोच सुनील ढुल ने कहा कि हरियाणा की मिट्टी और यहां के दूध-दही से पहलवान तैयार होते हैं। तनु ने जिस तरह मेहनत की है, वह पूरे परिवार और गांव के लिए गर्व की बात है। तनु के पिता वीरेंद्र शास्त्री सरकारी विद्यालय में संस्कृत अध्यापक हैं, जबकि मां सुमन लता गृहिणी हैं। परिवार ने हमेशा तनु का हौसला बढ़ाया और उसकी खेल प्रतिभा को आगे बढ़ाने में पूरा सहयोग दिया। परिवार का कहना है कि इतनी कम उम्र में तनु ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है और उन्हें उम्मीद है कि वह भविष्य में और बड़े मुकाबले जीतेगी तथा ओलंपिक में पदक जीतकर देश का नाम रोशन करेगी। परिजनों के अनुसार, तनु बचपन से ही काफी सक्रिय थी और खेलों के प्रति उसका जुनून साफ दिखाई देता था। वह बचपन में पेड़ों पर भी चढ़ जाती थी और मैदान से उसका लगाव शुरू से ही रहा। विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर तनु शर्मा ने साबित कर दिया है कि छोटे गांवों की बेटियां भी अपनी मेहनत, लगन और मजबूत इरादों के दम पर विश्व मंच पर देश का परचम लहरा सकती हैं।