विश्व में पहली बार ऐसा हाथी में रैबीज पाया गया है। जंगली जानवर में रैबीज का लक्षण मिलना पशु वैज्ञानिकों के लिए चिंता का विषय बन गया है।वैज्ञानिकों ने इस पर शोध शुरु कर दिया है। बिहार से आए हाथी के सैंपल में रैबीज पाया गया। अब तक वन्य प्राणियों में रैबीज नहीं मिल रहा था। वर्ष 2025 में आए सैंपल में रैबीज पाया गया है। वर्ष 2013 से 2025 तक 2689 ब्रेन सैंपल लिए गए। जिसमें 1838 करीब 68 प्रतिशत पॉजिटीव केस मिले। लुवास में एक कार्यक्रम में पहुंचे कॉलेज ऑफ वेटरनरी साइंसेज हेबल बंगलुरू के निदेशक डॉ. एस ईशल्लुर ने अमर उजाला से खास बातचीत में बताया कि वन्य प्राणियों में कुछ हद तक रैबीज मिलता था। पहली बार में हाथी में रैबीज के लक्षण मिले हैं। विश्वभर में रैबीज जांच की 14 रैफरेंस लैब में से एक लैब हमारे संस्थान में हैं। जिसमें देश के हर एक हिस्से से सैंपल आते हैं। देश भर के चिकित्सकों को रैबीज के टेस्ट सैंपल लेने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिसकी शुरुआत कर दी गई है। ब्रेन से सैंपल लेने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। बंगलुरू के मास्टर ट्रेनर देश भर के चिकित्सकों को प्रशिक्षण देंगे। देश के कुछ हिस्सों में नई प्रयोगशालाएं भी स्थापित की जाएंगी। कुत्ते के कारण रैबीज होने से वर्ष 2025 में 5624 लोगों की मौत हुई। रैबीज से मौत के पिछले दस साल में 71 प्रतिशत केस कम हो गए हैं। रैबीज के 98 प्रतिशत मामले कुत्ते के आदमी को काटने से हो रहे हैं। 2015 में वर्ल्ड आर्गेनाइजेशन एनीमल हेल्थ से जुड़े देशों ने मिलकर फैसला लिया था। जिसमें 2030 तक कुत्ते से फैलने वाले रैबीज को पूरी तरह से खत्म करने की योजना बनाई गई थी। 70 प्रतिशत कुत्तों को रैबीज को लेकर टीकाकरण जरूरी है। इसी प्रोग्राम के चलते रैबीज से मौत के केस कम हो रहे हैं। अंध विश्वास के चलते लोग कुत्ते के काटने पर लाल मिर्च, काफी पाऊडर, हर्बल मेडिसन आदि डालते हैं। ऐसा करना खतरनाक साबित होता है। रैबीज हुआ तो 100 प्रतिशत मौत तय उन्होंने कहा कि अगर किसी को रैबीज हुआ तो उसकी मौत तय है। रैबीज होने के बाद मरीज को बचाया नहीं जा सकता। इसी कारण हमारा पूरा फोकस रैबीज को फैलने से रोकने पर है। काफी लोग कुत्ते के काटने के बाद एक या दो टीका लेने के बाद आगे टीकाकरण नहीं कराते। कम से 4 से 5 वैक्सीन जरूरी हैं। रैबीज होने के बाद लोगों को बचाने के लिए वैक्सीन पर रिसर्च चल रहा है। ओरल वैक्सीन पर काम कर रहे वैज्ञानिक ... पालतु कुत्तों को वैक्सीन देना आसान है लेकिन जंगली जानवरों को वैक्सीन देना सबसे बड़ी चुनौती है। ऐसे जानवरों को वैक्सीन देने के लिए उनको पकड़ कर काबू करना बड़ी समस्या है। अभी चिकित्सक ऐसी वैक्सीन पर काम कर रहे हैं जो जानवरों को खाने के जरिए दी जा सकेगी। वह ओरल वैक्सीन मीट या किसी अन्य खाने में मिला कर दे सकेंगे। दो साल में ऐसी वैक्सीन मार्केट में आ आएगी। हमारी लैब में इस वैक्सीन पर शोध चल रहा है। आदमी से भी दूसरे व्यक्ति को हो सकता है रैबीज... अगर किसी व्यक्ति को रैबीज हो जाए और वह व्यक्ति किसी को काट ले तो उसे भी रैबीज हो जाएगा। आदमी के मुंह में भी लार होती है। लार के जरिए रैबीज दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है। अब तक देश में ऐसा कोई केस नहीं आया है।