वृंदावन के 30 कलाकारों ने अग्रसेन भवन में रासलीला की मोहक प्रस्तुति दी। राधा-कृष्ण के रास दर्शन के बाद श्रीरामचरितमानस से नगर दर्शन पुष्प वाटिका प्रसंग की प्रस्तुति दी गई। श्रीनिकुंज बिहारी रासलीला मंडल, वृंदावन के निर्देशक कुंजबिहारी शर्मा (भैय्या) ने कहा कि रामचरितमानस पूजनीय ग्रंथ है। राम को प्रत्येक भारत वासी भगवान के रूप में पूजते हैं जबकि रावण परम विद्वान होने पर भी असुर माना जाता है। इसलिए राम चरित्र अनुकरणीय है। मुनि विश्वामित्र की आज्ञा से राम-लक्ष्मण नगर दर्शन के लिए जाते हैं, जहां जनकपुर के बालक वृंद जनकपुर की शोभा का वर्णन करते हैं। दोनों भाईयों पर पुष्प से वर्षा की जाती है। गुरुदेव की आज्ञा पाकर दोनों भाई फूल लेने के लिए पुष्प वाटिका जाते हैं। वहां माली से बड़ा मधुर संवाद होता है और राम की जानकी से पहली मुलाकात होती है। रासलीला में राम की भूमिका अनुज शर्मा और जानकी की भूमिका लोकेश शर्मा ने निभाई। राजेंद्र शर्मा माली और भरतलाल शर्मा जनक के वेश में मंचासीन रहे।