डीएसपी श्रद्धा सिंह ने कहा कि आपको अपने अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए। आपके साथ कुछ गलत हो तो अकेले सहन मत करो। आपके साथ हुआ तो उसके बारे में अपने शिक्षक को बताओ, अपने परिजनों को बताओ या पुलिस को बताओ। अगर कोई सोशल मीडिया के जरिए आपको परेशान कर रहा है तो उसके खिलाफ भी आवाज उठाओ। अपने फोन, टैब का पढ़ाई के लिए उपयोग करो। डीएसपी श्रद्धा सिंह शनिवार को महिला पुलिस थाना में अमर उजाला फाउंडेशन के दोस्त पुलिस कार्यक्रम के तहत पहुंची राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की छात्राओं को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि रील की दुनिया को सच्ची मत मानना, उससे काफी झूठ भी भरा होता है। साइबर वर्ल्ड में काफी फ्रॉड होते हैं। अगर कोई अनजान आदमी आपको मिलने के लिए बुलाए तो कभी मत जाना। जिन लोगों को आप वास्तविक तौर पर जानती हो उन पर ही विश्वास करना। 10 से 12वीं कक्षा तक की लड़कियों का सबसे अधिक शोषण होता है। यह समय आपकी पढ़ाई का है तो आप इसे उसके लिए ही उपयोग करें। शिक्षा से जुड़े यू टयूब चैनल ही देखने चाहिए। मोबाइल का उपयोग कम से कम करें। इससे पहले हेड कांस्टेबल अनिता सिंह ने छात्राओं को महिला थाना का भ्रमण कराया। छात्राओं को गेट पर एंट्री करने से लेकर जांच करने, गिरफ्तारी करने की तक प्रक्रिया को समझाया। छात्राओं को उनके अधिकारों के बारे में भी बताया। अनिता सिंह ने बताया कि किस पुलिसकर्मी का क्या कार्य होता है। किस तरह से रोजाना की ड्यूटी का निर्वहन किया जाता है। पुलिस की मदद के लिए डायल 112 नंबर हमेशा याद रखें। इस नंबर पर आप कॉल करेंगी तो दस मिनट में पुलिस आप तक पहुंच जाएगी। महिला थाना प्रभारी सुलेखा ने छात्राओं को कहा कि पुलिस को देख कर डरना चाहिए। पुलिस आपकी दोस्त तथा अपराधियों की दुश्मन है। पुलिस आपकी मदद के लिए दिन रात तत्पर है। पुलिस की समर्पण टीम समय पर स्कूलों में जाकर छात्राओं को जागरूक करती है। पुलिस के दरवाजे हर एक व्यक्ति के लिए हमेशा खुले हैं। छात्राओं को महिला थाना भ्रमण में कई नई जानकारियां मिली। छात्राओं के मन से पुलिस का डर कम हुआ है। छात्राओं ने देखा कि पुलिस किस तरह से कार्रवाई होती है। अपराधों से किस तरह से बचना चाहिए। छात्राओं को गुड टच बेड टच से भी अवगत कराया गया। पुलिस ने समझाया कि अगर आपके साथ कुछ गलत हो जाए तो उसको सहन नहीं करना चाहिए। डीएसपी श्रद्धा सिंह ने छात्राओं ने बताया कि केवल अच्छे अंक हासिल कर लेना जिंदगी नहीं है। अच्छे अंकों के साथ हमारा सम्पूर्ण व्यक्तित्व विकास होना चाहिए। -अर्चना सुहासिनी, हिंदी प्राध्यापिका।