जिले के एक गांव की 18 वर्षीय दुष्कर्म पीड़ित जच्चा की निजी अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। इससे पहले बुधवार रात को उसकी बच्ची की भी उपचार के दौरान मौत हो गई। सूचना मिलने पर पुलिस ने नागरिक अस्पताल पहुंच कर दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराया। पुलिस मामले की जांच कर रही है। पुलिस ने नवंबर में पीड़िता की शिकायत पर अज्ञात के खिलाफ दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया था। नागरिक अस्पताल परिसर में मृतका के परिजनों ने बताया कि उनकी 17 वर्षीय बेटी घर पर रहती थी। 11 नवंबर को बेटी की तबीयत खराब होने पर हम उसे उपचार के लिए नागरिक अस्पताल में लाए। जांच के बाद चिकित्सकों ने बताया था कि वह 7 महीने की गर्भवती है। हमने उसके बाद उसका उपचार शुरू करवाया और पुलिस को शिकायत दी थी। उसकी तबीयत 30 नवंबर को बिगड़ गई थी। हमने उसे निजी अस्पताल में दाखिल करवाया था। उसने 3 दिसंबर को एक बच्ची को जन्म दिया। बच्ची ने बुधवार रात को दम तोड़ दिया। वीरवार सुबह हमारी बेटी की भी उपचार के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि हमने बेटी से कई बार पूछा था कि तेरे साथ किसने गलत काम किया, मगर उसने इस बारे में हमें कुछ नहीं बताया। खून की कमी- संक्रमण मौत का कारण.. उनका इलाज करने वाले डॉ. महेंद्र सिंह के मुताबिक मां के शरीर में खून की कमी थी। बच्चे को भी संक्रमण हुआ था। 12 यूनिट रक्त चढ़ाया गया। इसके लिए पुलिसकर्मियों ने भी रक्तदान किया था। बच्चे को संक्रमण अधिक फैलने पर रेफर किया गया तो अग्रोहा के मेडिकल कॉलेज में भी बच्चे का इलाज किया गया। बच्चे के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। रेफर किए जाने के बाद परिजन उसे निजी अस्पताल में ले गए थे। वीरवार दोपहर एक बजे जच्चा-बच्चा को मृत घोषित कर दिया गया। सिटी थाने की जांच अधिकारी पूजा ने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला नागरिक अस्पताल की मोर्चरी में भेज दिया। पुलिस घटना की जांच कर रही है। फिलहाल किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं है। बाल कल्याण समिति की सदस्य सुनीता रेड्डू ने बताया कि घटना की जांच की जा रही है। सहमति संबंध में रह रही थी जच्चा की मां पीड़िता की मां अपने पति से तलाक के बाद किसी अन्य व्यक्ति के साथ सहमति संबंध में रह रही थी। इस कारण अस्पताल में इलाज के दौरान पीड़िता जच्चा का पिता नहीं आया जबकि पीड़िता जच्चा की मां और उसके साथ रहने वाला प्रेमी शुरू से अंत तक अस्पताल में मौजूद रहे।