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हिसार: आजाद हिंद फौज के सिपाही भागमल 5 साल तक नहीं लोटे थे घर, परिजनों ने मान लिया था शहीद

शाहिल शर्मा Updated Tue, 12 Aug 2025 12:12 PM IST

स्वतंत्रता सेनानी व आजाद हिंद फौज के सिपाही भागमल पान्नू 5 साल तक घर नहीं आए थे। परिवार वालों ने भी उन्हें शहीद मानकर उनके आने की आस छोड़ दी थी। यही नहीं भागमल ने काले पानी की सजा भी भुगती थी। भागमल से शुरू हुई देश सेवा की पंरपरा उनके परिवार में आज भी कायम है। गांव पुट्ठी (सैमाण) निवासी हवा सिंह पान्नू ने बताया कि उनके पिता भागमल का जन्म 13 जून 1914 को हुआ था। उनके पिता दुलाराम पान्नू एक किसान थे। वह वर्ष 1941 में द्वितीय विश्च युद्ध के दौरान ब्रिटिश सेना की जाट रेजीमेंट में बतौर सिपाही भर्ती हुए थे। इसके बाद उन्होंने रंगून व जापान में लड़ाई लड़ी। वर्ष 1942 में सिंगापुर में अंग्रेजी सेना को हथियार डालने पड़े और सब सैनिकों को बंदी बना लिया गया। उन बंदियों में भागमल भी थे। इन सभी सैनिकों को आजाद हिंद फौज में शामिल कर लिया गया। भागमल भी आजाद हिंद फौज में शामिल हो गए। इन्होंने वर्ष 1942 से 1944 तक अनेक मोर्चों पर लड़ाई लड़ी। 4 फरवरी 1944 को आजाद हिंद फौज ने अराकान युद्ध के मोर्चे पर लड़ाई शुरू कर दी। उ समय भागमल भी इसी मोर्चे पर थे। वर्ष 1945 तक भागमल का कोई अता-पता नहीं था। घरवालों ने उन्हें शहीद मानकर अपने दिल पर पत्थर रख लिया और उनके जिंदा होने की आस छोड़ दी। भागमल लंबे समय तक जेल जीवन बिताकर अपने घर लौटे। गांव वालों ने उनका स्वागत किया। उनके पिता बताते थे कि वह काले पानी की सजा भी काटी थी। उनके पिता ने भागमल पान्नू ने 11 अगस्त 1984 को अंतिम सांस ली।

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